कनाडा

कनाडा में खालिस्तानी गतिविधियों पर रिपोर्ट, संसद में बढ़ी चिंता

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कनाडा की खुफिया एजेंसी ‘कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा’ (सीएसआइएस) की 2025 की वार्षिक रिपोर्ट सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। इस रिपोर्ट को कनाडाई संसद में पेश किया गया, जिसमें देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है।

रिपोर्ट में यह स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी चरमपंथी तत्व राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक लगातार बना रहने वाला गंभीर खतरा हैं। एजेंसी के अनुसार, ये तत्व न केवल विचारधारा के स्तर पर सक्रिय हैं, बल्कि कुछ मामलों में हिंसक गतिविधियों से भी जुड़े पाए गए हैं, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।

इस खुलासे ने उन पुराने जख्मों को भी फिर से ताजा कर दिया है, जो करीब चार दशक पहले हुए एअर इंडिया फ्लाइट 182 विस्फोट से जुड़े हैं। उस भयावह घटना में 329 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी, जिसे कनाडा के इतिहास की सबसे गंभीर आतंकी घटनाओं में गिना जाता है।
रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह मुद्दा केवल कनाडा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा सहयोग के संदर्भ में भी अहम बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के निष्कर्ष देशों के बीच सुरक्षा समन्वय और खुफिया साझेदारी की जरूरत को और अधिक रेखांकित करते हैं।

कनाडा में सुरक्षा के लिए चुनौती बने खालिस्तानी चरमपंथी तत्व

रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी चरमपंथी समूह अब भी अपने उग्रवादी एजेंडे को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं। इसमें यह भी सामने आया है कि ये नेटवर्क विभिन्न माध्यमों के जरिए समर्थन जुटाने की कोशिश करते हैं और कुछ मामलों में अनजान लोगों से धन इकट्ठा कर उसे संदिग्ध गतिविधियों की ओर मोड़ देते हैं। यह पहलू सुरक्षा एजेंसियों के लिए खास चिंता का कारण बना हुआ है।

रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि ऐसे समूह कभी-कभी खुले और वैध ढांचों का इस्तेमाल कर अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं, जिससे उनकी पहचान और निगरानी और जटिल हो जाती है। यही वजह है कि इन पर नजर रखना और उनकी गतिविधियों को सीमित करना सुरक्षा तंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

इसके साथ ही रिपोर्ट चेतावनी देती है कि इनकी सक्रियता का असर सिर्फ कनाडा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कनाडा के हितों और संबंधों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, एक सकारात्मक पहलू यह भी सामने आया है कि वर्ष 2025 के दौरान कनाडा में इस तरह के किसी बड़े हमले की पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद एजेंसियां सतर्क हैं और संभावित खतरों को रोकने के लिए लगातार निगरानी और सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जा रहा है।

जहां एक तरफ खुफिया रिपोर्ट में चीन, रूस और भारत जैसे देशों पर कनाडा की राजनीति में कथित दखल और जासूसी से जुड़े आरोपों का जिक्र किया गया है, वहीं दूसरी ओर देश के राजनीतिक नेतृत्व के रुख में बदलाव के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के पद संभालने के बाद भारत और कनाडा के रिश्तों में आई तल्खी कुछ कम होती नजर आ रही है। दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग को लेकर नए सिरे से सकारात्मक माहौल बनने की चर्चा हो रही है।

इसी बीच, रॉयल कनाडाई माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) के कमिश्नर माइक डुहेम ने एक इंटरव्यू में कहा कि वर्तमान में कनाडा में सामने आ रहे आपराधिक मामलों को किसी विदेशी सरकार या विशेष रूप से भारत से सीधे तौर पर जोड़ने के स्पष्ट सबूत नहीं मिले हैं। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब दोनों देशों के संबंधों को लेकर पहले काफी तनाव देखने को मिला था।

इस तरह के संकेत यह दर्शाते हैं कि सुरक्षा चिंताओं और राजनीतिक आरोपों के बीच अब संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि कूटनीतिक संबंधों को बेहतर दिशा दी जा सके।

भारत ने कनाडा की ओर से पहले लगाए गए आरोपों को लगातार “राजनीतिक मकसद से प्रेरित” बताते हुए नकारा है और कहा है कि ऐसे दावों के पीछे ठोस आधार नहीं है। नई परिस्थितियों में भी भारत का रुख यही रहा है कि द्विपक्षीय मुद्दों को तथ्यों और पारदर्शी जांच के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।

वहीं, मौजूदा परिदृश्य में कनाडा के सामने एक जटिल स्थिति उभरकर आई है। एक तरफ उसे अपनी आंतरिक सुरक्षा से जुड़े जोखिमों और खतरों से निपटना है, तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय संबंधों, खासकर भारत जैसे अहम साझेदार के साथ रिश्तों को संतुलित और स्थिर बनाए रखना भी जरूरी है।

इसी संतुलन को साधने के लिए कनाडा सरकार एक तरफ सुरक्षा एजेंसियों की चेतावनियों को गंभीरता से ले रही है, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक स्तर पर संवाद और सहयोग बढ़ाने की कोशिश भी कर रही है। यह स्थिति दर्शाती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक संबंधों के बीच तालमेल बैठाना किसी भी देश के लिए कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

snrhd

Sneha Sharma is a Senior Hindi Correspondent for StudioX News Canada, leading the Hindi editorial desk at hi.studioxnews.ca. She brings over three years of journalism experience across print, digital, and broadcast media in India. Her career includes roles at Jagran New Media (Her Zindagi), Zee News Hindi, TV100, Rashtriya Sahara, Amar Ujala, and Search India News, where she worked as a content writer, ground reporter, and news anchor. She holds a BA in Journalism and Mass Communication from Dev Sanskriti University, Haridwar. At StudioX News, she covers Canada immigration, community affairs, South Asia news, and diaspora stories for Hindi-speaking communities across Canada.

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