राजनीति

ईरान पर ट्रंप का बड़ा दावा: सुप्रीम लीडर के बेटे मोजतबा खामेनेई के ठिकाने को लेकर की टिप्पणी

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पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के संबंध में तीखे बयान दिए हैं। उन्होंने ईरान के मौजूदा नेतृत्व को ‘बुरा’ और ‘शैतानी’ करार देते हुए यह भी दावा किया कि वह देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई के ठिकाने के बारे में जानते हैं। ट्रंप के इन बयानों ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है, खासकर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच। उनके अनुसार, अगर वह अभी भी राष्ट्रपति होते, तो ईरान ने इजरायल पर हमला करने की हिम्मत नहीं की होती, और क्षेत्र में शांति अधिक प्रभावी ढंग से बनी रहती।

ट्रंप ने अपने बयानों में विशेष रूप से मोजतबा खामेनेई का जिक्र किया है। मोजतबा को ईरान के राजनीतिक गलियारों में एक प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता है, और कई लोग उन्हें अपने पिता के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में भी देखते हैं। ट्रंप ने सीधे तौर पर कहा, “मैं जानता हूं कि मोजतबा खामेनेई कहां हैं। वे बहुत बुरे लोग हैं।” यह टिप्पणी सीधे तौर पर ईरानी सत्ता प्रतिष्ठान को चुनौती देने वाली मानी जा रही है। ट्रंप अक्सर अपने प्रतिद्वंद्वियों या विरोधियों पर व्यक्तिगत स्तर पर हमला करने के लिए जाने जाते हैं, और उनका यह बयान इसी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है, जिसका उद्देश्य ईरान के नेतृत्व पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना है। यह एक सीधा संदेश है कि अमेरिका, यदि ट्रंप के नेतृत्व में हो, तो उसे ईरान की आंतरिक गतिशीलता की पूरी जानकारी है।

ईरान के साथ एक नए परमाणु समझौते की संभावना पर भी ट्रंप ने अपनी राय रखी। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर अमेरिका के साथ कोई “असली डील” होती है, तो ईरान के लिए “अरबों डॉलर” के रास्ते खुल सकते हैं। यह एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव है, क्योंकि ईरान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह डील उस पुराने समझौते (संयुक्त व्यापक कार्य योजना – जेसीपीओए) से पूरी तरह अलग होगी, जिससे उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान अमेरिका को एकतरफा बाहर निकाल लिया था। उन्होंने उस समझौते को “सबसे भयानक और विनाशकारी” करार दिया था, यह दावा करते हुए कि उसने ईरान को पर्याप्त धन उपलब्ध कराया था, जिसका उपयोग उसने अपनी क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों और परमाणु हथियार कार्यक्रमों को वित्तपोषित करने के लिए किया। ट्रंप का मानना है कि एक नया, अधिक कठोर और व्यापक समझौता ही ईरान को अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़ने, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को रोकने और आतंकवाद का समर्थन बंद करने के लिए मजबूर कर सकता है, जिससे क्षेत्र में स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त होगा।

पूर्व राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि ईरान का मौजूदा नेतृत्व उनसे “डरा हुआ” है। उन्होंने विश्वासपूर्वक कहा कि ईरानी शासक उनकी वापसी से भयभीत हैं और वे केवल उन्हीं से डरते हैं। ट्रंप ने अपनी बात को मजबूत करते हुए कहा कि उनके राष्ट्रपति रहते ईरान की हिम्मत नहीं होती कि वह इजरायल पर सीधे हमला करता। यह टिप्पणी हाल ही में ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों के संदर्भ में आई है, जिसने पूरे मध्य पूर्व में तनाव को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ा दिया है। ट्रंप का मानना है कि उनकी मजबूत विदेश नीति, जिसमें ‘अधिकतम दबाव’ की रणनीति शामिल थी, और ईरान के प्रति सख्त रुख ने ऐसे हमलों को प्रभावी ढंग से रोका होता, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित होती। उनका तर्क है कि वर्तमान अमेरिकी प्रशासन की नीति ने ईरान को अधिक आक्रामक होने के लिए प्रोत्साहित किया है।

ट्रंप के इन बयानों का गहरा कूटनीतिक महत्व है। एक ओर, वे ईरानी सरकार पर सीधा दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं और उसे चेतावनी दे रहे हैं कि भविष्य में अमेरिकी नीति उनके प्रति काफी कठोर हो सकती है। यह दबाव न केवल ईरान की विदेश नीति को प्रभावित कर सकता है, बल्कि उसकी आंतरिक स्थिरता पर भी सवाल उठा सकता है। दूसरी ओर, वे अमेरिकी मतदाताओं को यह भी संकेत दे रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में उनकी वापसी अमेरिका के लिए अधिक स्थिरता और सुरक्षा लाएगी, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक भू-राजनीति में अनिश्चितता बढ़ रही है। उनका “डील” का प्रस्ताव ईरान के लिए आर्थिक प्रोत्साहन की संभावना दिखाता है, लेकिन यह इस शर्त पर आधारित है कि ईरान अपनी क्षेत्रीय नीतियों, परमाणु कार्यक्रमों और मानवाधिकार रिकॉर्ड में महत्वपूर्ण बदलाव करे। यह एक प्रकार का ‘गाजर और छड़ी’ दृष्टिकोण है, जहां आर्थिक लाभ का वादा है, लेकिन गंभीर रियायतों की मांग भी की गई है।

मोजतबा खामेनेई का मुद्दा ईरान की आंतरिक राजनीति के लिए भी संवेदनशील है। अयातुल्लाह अली खामेनेई की बढ़ती उम्र के साथ, उनके उत्तराधिकार का सवाल ईरान के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होता जा रहा है। मोजतबा का नाम अक्सर इस दौड़ में सबसे आगे आता रहा है, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है और ईरान का उत्तराधिकार तंत्र काफी जटिल है। ट्रंप का उनके ठिकाने के बारे में जानने का दावा, भले ही वह कितना भी प्रतीकात्मक क्यों न हो, ईरान के सत्ता प्रतिष्ठान के भीतर संभावित दरारों और कमजोरियों को उजागर करने की एक कोशिश हो सकती है, या कम से कम यह संदेश देने की कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की पहुँच ईरानी नेतृत्व के करीब तक है।

ट्रंप ने बार-बार कहा है कि ईरान एक “आतंकवादी राज्य” है और उसके मौजूदा नेताओं ने अपने लोगों और क्षेत्र को “तबाह” कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के पास अपार प्राकृतिक संसाधन हैं, जैसे तेल और गैस, जो अगर सही तरीके से इस्तेमाल किए जाएं, तो देश को समृद्ध बना सकते हैं और उसके नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार कर सकते हैं। लेकिन उनके अनुसार, मौजूदा सरकार की नीतियां देश को गरीबी, अलगाव और क्षेत्रीय अस्थिरता की ओर धकेल रही हैं, जिससे आम ईरानी नागरिक पीड़ित हैं। उनका मानना है कि ईरान को एक ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो अपने लोगों के हित में काम करे, न कि केवल अपनी विचारधारा और क्षेत्रीय प्रभुत्व की महत्वाकांक्षाओं को बढ़ावा देने में।

संक्षेप में, डोनाल्ड ट्रंप के नवीनतम बयान ईरान के प्रति उनकी कठोर और अपरिवर्तनवादी नीति को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। वे ईरान के मौजूदा नेतृत्व को सीधे चुनौती दे रहे हैं, विशेषकर सुप्रीम लीडर के बेटे मोजतबा खामेनेई का जिक्र करके और उनके ठिकाने के बारे में जानकारी होने का दावा करके। इसके साथ ही, वे ईरान के साथ एक नए, मजबूत समझौते की पेशकश कर रहे हैं, जिसमें अरबों डॉलर के आर्थिक लाभ का वादा है, बशर्ते ईरान अपनी मौजूदा नीतियों, विशेष रूप से परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय आक्रामकता को बदल दे। ये बयान वैश्विक स्तर पर मध्य पूर्व की राजनीति और अमेरिका-ईरान संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं, खासकर 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दृष्टिकोण से।

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