Canada Us Trade War Alcohol Battle: कनाडा-अमेरिका के व्यापार युद्ध में शराब पर छिड़ी जंग, दोनों देशों के बीच बढ़ा तनाव: कनाडा और अमेरिका के बीच चल रहे व्यापारिक तनाव में अब शराब भी एक बड़े विवाद का हिस्सा बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब अधिकांश कनाडाई सामानों पर नया 50 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया, तो इसके पीछे जिन कारणों का हवाला दिया गया, उनमें अमेरिकी शराब की बिक्री पर कनाडा के कई प्रांतों में लगी रोक भी शामिल थी।
ट्रंप प्रशासन ने कनाडा के इस कदम को ‘भेदभावपूर्ण’ और ‘जवाबी कार्रवाई’ बताया। हालांकि, सवाल यह है कि आखिर शराब दोनों देशों के बीच बढ़ते ट्रेड वॉर में इतना अहम मुद्दा कैसे बन गई?
दरअसल, सोमवार को ट्रंप ने नए टैरिफ से जुड़े तीन कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए। इनमें कनाडा के प्रांतों और क्षेत्रों द्वारा अमेरिकी शराब उत्पादों के बहिष्कार, अमेरिका में बने वाहनों और ऑटो पार्ट्स पर कनाडा की जवाबी ड्यूटी और कनाडा की सप्लाई मैनेजमेंट व्यवस्था के तहत अमेरिकी डेयरी उत्पादों पर लगाए गए कोटा को टैरिफ के कारणों में शामिल किया गया।
कनाडा ने अमेरिकी शराब को बनाया जवाबी कार्रवाई का जरिया
Concordia University के अर्थशास्त्री मोशे लैंडर के मुताबिक, जब 2025 में ट्रंप प्रशासन ने कनाडा की अर्थव्यवस्था के कई हिस्सों पर टैरिफ लगाए और यहां तक कि कनाडा को अमेरिका का ‘51वां राज्य’ बनाने की बात कही, तब अमेरिकी शराब कनाडाई प्रांतों के लिए जवाबी कार्रवाई का आसान विकल्प बन गई।
उनके मुताबिक, कनाडा के ज्यादातर प्रांतों ने अब अपनी शराब की दुकानों की शेल्फ से अमेरिकी शराब को हटा दिया है। हालांकि, अल्बर्टा और सस्केचेवान में स्थिति अलग है।
लैंडर ने कहा कि ‘Elbows Up’ अभियान के तहत कनाडाई लोगों ने अमेरिकी उत्पादों के विकल्प तलाशने शुरू किए। शराब के मामले में यह बदलाव अपेक्षाकृत आसान था, क्योंकि कनाडा में ही इसके कई विकल्प मौजूद हैं।
कनाडा में शराब के स्थानीय विकल्पों की भरमार
अर्थशास्त्री के अनुसार, अमेरिकी शराब की जगह कनाडाई उत्पादों को अपनाना इसलिए भी आसान रहा क्योंकि देश में कई प्रमुख वाइन उत्पादक क्षेत्र हैं। इसके अलावा कनाडा अपनी बीयर और क्राफ्ट ब्रुअरीज के लिए भी जाना जाता है।
यानी कनाडाई उपभोक्ताओं के पास अमेरिकी शराब को छोड़कर स्थानीय ब्रांड चुनने के पर्याप्त विकल्प मौजूद थे। ऐसे में शराब का बहिष्कार एक ऐसा कदम बन गया, जिसका असर अमेरिकी कंपनियों पर भी पड़ सकता था और कनाडा के लोगों के लिए विकल्प तलाशना भी मुश्किल नहीं था।
डग फोर्ड का शराब की बोतल जमीन पर उड़ेलने का वीडियो हुआ चर्चा में
अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ कनाडाई विरोध का प्रतीक शराब उस समय और ज्यादा चर्चा में आ गई, जब सितंबर 2025 में ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने Crown Royal की एक पूरी बोतल जमीन पर उड़ेल दी थी।
यह कदम उस समय उठाया गया था, जब व्हिस्की बनाने वाली कंपनी ने ओंटारियो स्थित अपनी बॉटलिंग फैसिलिटी को बंद करने का फैसला किया था। फोर्ड ने इस फैसले पर नाराजगी जाहिर करते हुए कंपनी के CEO को कड़ा संदेश दिया था।
उन्होंने कहा था कि अगर कंपनी उनके लोगों को नुकसान पहुंचाती है, तो वह भी जवाबी कदम उठाएंगे।
इस घटना के बाद शराब केवल एक उपभोक्ता उत्पाद नहीं रही, बल्कि कनाडा और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव में विरोध और जवाबी कार्रवाई का प्रतीक बन गई। अब ट्रंप द्वारा नए 50 फीसदी टैरिफ के लिए अमेरिकी शराब की बिक्री पर रोक का हवाला दिए जाने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर के केंद्र में आ गया है।
2018 में भी कनाडा ने अमेरिकी शराब को बनाया था निशाना
कनाडा की ओर से ट्रेड वॉर के दौरान अमेरिकी शराब को निशाना बनाने का यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2018 में भी दोनों देशों के बीच व्यापारिक विवाद के दौरान कनाडा ने अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी कार्रवाई की थी।
उस समय कनाडा ने मुख्य रूप से रिपब्लिकन समर्थक और स्विंग स्टेट्स से आने वाले कई उत्पादों को निशाना बनाया था। इनमें Kentucky bourbon, Wisconsin cheese और Florida orange juice जैसे उत्पाद शामिल थे।
अर्थशास्त्री लैंडर के मुताबिक, इस तरह की रणनीति का मकसद अमेरिकी सरकार पर अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाना होता है। जब किसी राज्य के उत्पादों और कारोबार पर असर पड़ता है, तो वहां के कारोबारी और मतदाता अपनी सरकार से सवाल कर सकते हैं। इससे राजनीतिक नेतृत्व पर अपनी नीतियों को लेकर दोबारा विचार करने का दबाव बन सकता है।
अमेरिकी शराब उद्योग को बड़ा नुकसान
कनाडा के प्रांतों द्वारा अमेरिकी शराब पर लगाए गए प्रतिबंधों का सीधा असर अमेरिका के शराब उद्योग पर भी दिखाई दे रहा है। Wine Institute के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 से 2026 के बीच कनाडा को अमेरिकी वाइन के निर्यात में 78 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इससे अमेरिकी वाइन इंडस्ट्री को करीब 357 मिलियन अमेरिकी डॉलर के कारोबार का नुकसान होने का अनुमान है।
वहीं, Distilled Spirits Council of the United States के अनुसार, 2025 में कनाडाई प्रांतों द्वारा अमेरिकी शराब पर प्रतिबंध लगाने के करीब एक महीने के भीतर ही कनाडा में अमेरिकी स्पिरिट्स की बिक्री में 66 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ गई थी।
कनाडाई बाजार खोना अमेरिका के लिए चुनौती
Peterson Institute for International Economics के नॉन-रेजिडेंट सीनियर फेलो गैरी हफबॉयर के मुताबिक, अमेरिका में पहले से ही शराब की खपत में कमी देखी जा रही है, खासकर वाइन के बाजार पर दबाव है। ऐसे समय में कनाडा जैसा बड़ा बाजार अमेरिकी शराब उद्योग के लिए महत्वपूर्ण था।
उनका कहना है कि मुश्किल दौर में कनाडाई बाजार ने अमेरिकी शराब कंपनियों को काफी हद तक सहारा दिया था। अब इस बाजार को खोने से अमेरिकी शराब उद्योग पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है।
इस तरह कनाडा द्वारा अमेरिकी शराब के बहिष्कार ने दोनों देशों के बीच चल रहे ट्रेड वॉर को एक नया मोर्चा दे दिया है। जहां कनाडा इसे जवाबी कार्रवाई के तौर पर देख रहा है, वहीं अमेरिका के शराब उत्पादकों के लिए यह कदम बिक्री और निर्यात में भारी नुकसान का कारण बनता जा रहा है।
Sneha Sharma is a Senior Hindi Correspondent for StudioX News Canada, leading the Hindi editorial desk at hi.studioxnews.ca. She brings over three years of journalism experience across print, digital, and broadcast media in India. Her career includes roles at Jagran New Media (Her Zindagi), Zee News Hindi, TV100, Rashtriya Sahara, Amar Ujala, and Search India News, where she worked as a content writer, ground reporter, and news anchor. She holds a BA in Journalism and Mass Communication from Dev Sanskriti University, Haridwar. At StudioX News, she covers Canada immigration, community affairs, South Asia news, and diaspora stories for Hindi-speaking communities across Canada.

