कनाडा

कनाडाई विपक्ष के नेता पोइलीवरे का हमला अमरीका के साथ व्यापार वार्ता में अब कोई समझौता नहीं’

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा घोषित 50 प्रतिशत के व्यापक टैरिफ लागू होने में महज 10 दिन बचे हैं। इस बीच कनाडाई राजनीति में गर्माहट आ गई है। कंजर्वेटिव पार्टी के नेता पियरे पोइलीवरे ने प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से अमरीका के साथ जारी व्यापार वार्ता में किसी भी तरह की रियायत न देने की अपील करते हुए कहा है कि सरकार को अब अमरीकी मांगों के आगे झुकना बंद करना चाहिए।

पोइलीवरे और कनाडा-अमरीका संबंधों के कंजर्वेटिव आलोचक शुवालोय मजूमदार द्वारा प्रधानमंत्री कार्नी को लिखे गए एक पत्र में सरकार की व्यापारिक नीतियों पर कड़ा प्रहार किया गया है।

‘बदले में कुछ नहीं मिला, बस रियायतें दीं’

पत्र में पोइलीवरे और मजूमदार ने लिखा, “पिछले डेढ़ साल से आप एक के बाद एक अमरीकी मांगों के आगे झुकते आ रहे हैं, जबकि बदले में कनाडा को कुछ भी हासिल नहीं हुआ है।”

विपक्षी नेताओं ने ओटावा द्वारा दी गई हालिया रियायतों का हवाला देते हुए निम्नलिखित फैसलों का विरोध किया:

डिजिटल सर्विसेज टैक्स को हटाना: अमरीका के दबाव में आकर कर वापसी।

प्रतिशोधक शुल्क वापस लेना: CUSMA के तहत अधिकांश अमरीकी उत्पादों पर लगाए गए जवाबी टैरिफ को हटाना।

गॉर्डी हावे ब्रिज समझौता: राजस्व-साझाकरण (revenue-sharing) समझौते पर अमरीका को लाभ देना।

प्रधानमंत्री का रुख और 19 अगस्त की समय-सीमा

हाल ही में प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा था कि ओटावा एक ऐसे “विन-विन (दोनों पक्षों के लाभ वाले) सौदे” की तलाश में है जिसमें स्टील, एल्युमीनियम, वानिकी (फॉरेस्ट्री) और ऑटोमोबाइल क्षेत्र शामिल हों। हालांकि, उन्होंने सचेत किया कि 19 अगस्त से लागू होने वाले 50% टैरिफ से पहले यह सब हासिल हो पाएगा या नहीं, इस पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।

कनाडा और मैक्सिको दोनों ने पिछले महीने त्रिपक्षीय CUSMA व्यापार समझौते को अगले 16 वर्षों के लिए बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की थी। इसके विपरीत, अमरीका ने समझौते को वार्षिक समीक्षा के दायरे में रखने का विकल्प चुना।

डेयरी क्षेत्र, प्रांतीय दबाव और जवाबी कार्रवाई

कनाडा के डेयरी किसानों ने पहले ही सरकार को अपनी सुरक्षात्मक ‘आपूर्ति प्रबंधन प्रणाली’ (Supply Management System) से जुड़ा कोई भी समझौता न करने की चेतावनी दी है। प्रधानमंत्री कार्नी ने आश्वासन दिया है कि उनकी सरकार इस प्रणाली के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

दूसरी ओर, कुछ प्रांतीय मुख्यमंत्रियों ने अमरीकी शराब पर लगे प्रतिबंध हटाने से इनकार कर दिया है। उन्होंने अमरीका के खिलाफ ‘डॉलर के बदले डॉलर’ टैरिफ लगाने और ऊर्जा व क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) के निर्यात को रोकने जैसे सख्त जवाबी कदमों की मांग की है।

कंजर्वेटिव पार्टी की मुख्य मांगें

पोइलीवरे और मजूमदार का तर्क है कि कनाडा के नागरिक एक मजबूत समझौते के हकदार हैं, जिसका अर्थ है:

सॉफ्टवुड लंबर (इमारती लकड़ी): पूरी तरह से शून्य टैरिफ।

स्टील और एल्युमीनियम: निर्यात शुल्क की पूर्ण समाप्ति।

ऑटोमोबाइल: पूरी तरह से शुल्क-मुक्त ऑटो समझौता।

‘बाय अमेरिका’ नियमों से छूट: अमरीका के बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं में कनाडाई कंपनियों को पूर्ण छूट।

विपक्ष ने कनाडा की बातचीत की स्थिति को मजबूत करने के लिए ‘महत्वपूर्ण खनिजों का रणनीतिक रिजर्व’ बनाने का अपना आह्वान भी दोहराया।

पत्र के समापन में नेताओं ने लिखा, “कनाडाई नागरिक एक ऐसी सरकार के हकदार हैं जो हमारे श्रमिकों, हमारे परिवारों और हमारी संप्रभुता के लिए डटकर लड़ सके। अब और झुकना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

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Sneha Sharma is a Senior Hindi Correspondent for StudioX News Canada, leading the Hindi editorial desk at hi.studioxnews.ca. She brings over three years of journalism experience across print, digital, and broadcast media in India. Her career includes roles at Jagran New Media (Her Zindagi), Zee News Hindi, TV100, Rashtriya Sahara, Amar Ujala, and Search India News, where she worked as a content writer, ground reporter, and news anchor. She holds a BA in Journalism and Mass Communication from Dev Sanskriti University, Haridwar. At StudioX News, she covers Canada immigration, community affairs, South Asia news, and diaspora stories for Hindi-speaking communities across Canada.

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