Generation Fighter Jet Program: कनाडा अपनी पांचवीं पीढ़ी के F-35 फाइटर जेट्स की पूरी फ्लीट को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं कर पाया है, लेकिन देश ने भविष्य की सैन्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों पर नजरें टिकानी शुरू कर दी हैं।
संघीय सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह मंगलवार को ब्रिटेन, जापान और इटली की ओर से विकसित किए जा रहे छठी पीढ़ी के फाइटर जेट प्रोग्राम Global Combat Air Program (GCAP) में ऑब्जर्वर के तौर पर शामिल होने का ऐलान कर सकती है। हालांकि, कनाडा इस प्रोग्राम का पूर्ण भागीदार नहीं होगा, बल्कि उसे अंदरूनी जानकारी तक पहुंच हासिल होगी।
रक्षा मंत्री डेविड मैकगिन्टी इस समय ब्रिटेन में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय एयर शो में हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने पहले ही संकेत दिया है कि कनाडा की सरकार GCAP के बारे में ज्यादा जानकारी हासिल करने में रुचि रखती है।
Global Combat Air Program को ब्रिटेन, जापान और इटली ने मिलकर शुरू किया है। इसका उद्देश्य जापान के F-2 फाइटर जेट्स और ब्रिटेन व इटली की ओर से इस्तेमाल किए जा रहे Eurofighter Typhoon विमानों की जगह नई पीढ़ी के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान तैयार करना है।
हालांकि, प्रोग्राम अभी शुरुआती चरण में है और यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि कनाडा भविष्य में इसमें पूर्ण रूप से शामिल हो पाएगा या नहीं। खास तौर पर यह सवाल भी बना हुआ है कि अगर कनाडा इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनता है, तो क्या उसके घरेलू रक्षा उद्योग को इसमें पर्याप्त भूमिका मिल सकेगी।
नॉर्मन पैटरसन स्कूल ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स के प्रोफेसर फिलिप लागासे के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट अभी काफी शुरुआती और वैचारिक स्तर पर है। ऐसे में कनाडा की संभावित भागीदारी को लेकर अभी कई पहलुओं पर तस्वीर साफ होना बाकी है।
GCAP में कनाडा की संभावित भागीदारी पर कई सवाल, लागत और शर्तों को लेकर तस्वीर साफ नहीं
कनाडा के Global Combat Air Program (GCAP) से जुड़ने की संभावनाओं को लेकर अभी कई अहम सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं। कनाडियन ग्लोबल अफेयर्स इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष डेविड पेरी के मुताबिक, यह स्पष्ट नहीं है कि कनाडा इस प्रोग्राम में किस तरह शामिल हो सकता है और इसके लिए उसे कितनी आर्थिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
हालांकि, पेरी का मानना है कि ऑब्जर्वर का दर्जा हासिल करना कनाडा सरकार के लिए एक अहम शुरुआती कदम हो सकता है। इससे सरकार को प्रोग्राम को करीब से समझने और भविष्य में इसमें अधिक गंभीरता से शामिल होने की संभावनाओं का आकलन करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि कम से कम शुरुआत में इस प्रोग्राम को करीब से देखने और इसकी संभावनाओं को परखने में कोई नुकसान नहीं है। अगर यह कनाडा के लिए एक बेहतर और उपयोगी पहल साबित होती है, तो भविष्य में इसमें अधिक सक्रिय भूमिका निभाने पर विचार किया जा सकता है।
इस बीच, अमेरिका में अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों पर भी काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी कंपनी बोइंग F-47 नाम के एक नए ट्विन-इंजन फाइटर जेट का निर्माण कर रही है। इसे अमेरिकी वायुसेना के F-22 Raptor विमानों की जगह लेने के लिए विकसित किया जा रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, F-47 की अनुमानित कीमत करीब 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर प्रति विमान हो सकती है। यह लागत F-35 फाइटर जेट की तुलना में काफी अधिक है। ऐसे में कनाडा के लिए भविष्य के फाइटर जेट प्रोग्राम में शामिल होने का फैसला तकनीकी जरूरतों के साथ-साथ आर्थिक पहलुओं पर भी निर्भर करेगा।
कनाडा के लिए GCAP विकल्प बन सकता है, लेकिन F-35 खरीद पर अब भी असमंजस
RAND Corporation के वरिष्ठ मैनेजमेंट सिस्टम्स एनालिस्ट डेनियल नॉर्टन का कहना है कि अमेरिका अपने कुछ अत्याधुनिक सैन्य तकनीकों को दूसरे देशों के साथ साझा करने में रुचि नहीं दिखा सकता। ऐसे में कनाडा के लिए अमेरिकी फाइटर जेट प्रोग्राम से जुड़ना महंगा साबित हो सकता है, खासकर रॉयल कैनेडियन एयर फोर्स (RCAF) जैसी अपेक्षाकृत छोटी वायुसेना के लिए।
नॉर्टन के मुताबिक, ब्रिटेन, जापान और इटली के साथ चल रहा Global Combat Air Program (GCAP) कनाडा के लिए एक संभावित विकल्प हो सकता है। उनके अनुसार, यह प्रोग्राम अपेक्षाकृत कम लागत वाला हो सकता है और इसमें कनाडाई कंपनियों को विमान के विकास और उत्पादन में शामिल होने के ज्यादा अवसर मिल सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि GCAP में संभावित भागीदारी का विकल्प कनाडा को अन्य रक्षा ठेकेदारों के साथ बातचीत के दौरान बेहतर स्थिति दे सकता है। यानी कनाडा भविष्य के फाइटर जेट सौदों में अपनी शर्तों को मजबूत करने के लिए इस विकल्प का इस्तेमाल कर सकता है।
इस बीच, कनाडा की पांचवीं पीढ़ी के F-35 फाइटर जेट्स खरीदने की योजना भी अभी समीक्षा के दौर में है। सरकार ने 88 F-35 विमानों की पूरी खरीद को मार्च 2025 में समीक्षा के दायरे में डाल दिया था। यह फैसला अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से शुरू किए गए व्यापार युद्ध के बीच लिया गया था।
हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि GCAP को लेकर भी कनाडा को जल्दबाजी में फैसला नहीं करना चाहिए। Macdonald-Laurier Institute के वरिष्ठ फेलो रिचर्ड शिमूका के मुताबिक, इस प्रोग्राम के साझेदार देशों के बीच आंतरिक मतभेद सामने आए हैं। ऐसे में यह अभी स्पष्ट नहीं है कि आने वाले कुछ वर्षों में GCAP किस दिशा में आगे बढ़ेगा और इसकी अंतिम स्थिति क्या होगी।
कनाडा के सामने अब एक ओर F-35 खरीद को लेकर समीक्षा का सवाल है, तो दूसरी तरफ GCAP जैसे नए विकल्प में संभावित भागीदारी का रास्ता खुल रहा है। ऐसे में आने वाले समय में सरकार का फैसला देश की भविष्य की रक्षा रणनीति और घरेलू एयरोस्पेस इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
Sneha Sharma is a Senior Hindi Correspondent for StudioX News Canada, leading the Hindi editorial desk at hi.studioxnews.ca. She brings over three years of journalism experience across print, digital, and broadcast media in India. Her career includes roles at Jagran New Media (Her Zindagi), Zee News Hindi, TV100, Rashtriya Sahara, Amar Ujala, and Search India News, where she worked as a content writer, ground reporter, and news anchor. She holds a BA in Journalism and Mass Communication from Dev Sanskriti University, Haridwar. At StudioX News, she covers Canada immigration, community affairs, South Asia news, and diaspora stories for Hindi-speaking communities across Canada.

