कनाडा

कांगो में आधिकारिक घोषणा से महीनों पहले ही फैल चुका था इबोला: WHO का बड़ा खुलासा

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ब्राज़ाविल/किंशासा — कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) के पूर्वी हिस्से में तबाही मचा रहा इबोला वायरस का प्रकोप अपनी आधिकारिक घोषणा से महीनों पहले ही फैलना शुरू हो गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सोमवार को चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि रिकॉर्ड में अब तक का सबसे तेजी से फैलने वाला यह इबोला प्रकोप मई के बजाय फरवरी में ही शुरू हो चुका था, जिसके कारण अब स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए वायरस को नियंत्रित करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।

शुरुआती मामलों को गलत तरीके से माना गया मलेरिया और टाइफाइड

डब्ल्यूएचओ (WHO) के अफ्रीका क्षेत्रीय निदेशक डॉ. मोहम्मद याकूब जनाबी ने एक पत्रकार वार्ता में बताया कि जेनेटिक अनुक्रमण (Sequencing) के नमूनों से स्पष्ट होता है कि यह प्रकोप फरवरी में ही शुरू हो गया था। उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआत में इबोला के लक्षणों को गलती से मलेरिया और टाइफाइड समझ लिया गया था, जिससे संक्रमण का पता लगाने में महीनों की देरी हुई।

डॉ. जनाबी ने मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “फिलहाल हम वायरस के पीछे भाग रहे हैं और वायरस हमसे काफी आगे निकल चुका है।”

मृत्यु का आंकड़ा 1,900 के पार, 4,200 से अधिक मामले दर्ज

ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस घातक प्रकोप में अब तक 4,200 से अधिक पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 1,900 से अधिक मरीजों की जान जा चुकी है।

15 मई को घोषित हुआ यह प्रकोप पिछले अधिकांश इबोला मामलों से काफी अलग और खतरनाक है। इसका मुख्य कारण यह है कि इसके लिए इबोला की दुर्लभ ‘बुंदीबुग्यो’ (Bundibugyo) प्रजाति जिम्मेदार है, जिसके उपचार या रोकथाम के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत टीका (Vaccine) या दवा उपलब्ध नहीं है। शुरुआती चरणों में स्वास्थ्य टीमें केवल सामान्य इबोला वायरस का परीक्षण कर रही थीं, जिससे जांच और उपचार में भारी देरी हुई।

वायरस से लड़ने के प्रयासों से तेज है इसके फैलने की रफ्तार’ — WHO

कांगो की राजधानी किंशासा में शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात के बाद डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडहानॉम घेब्रेयेसस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्थिति की गंभीरता बयां की। उन्होंने कहा कि कई प्रभावित इलाकों (Hotspots) में नए मामलों की संख्या दोगुनी रफ्तार से बढ़ रही है।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि प्रकोप ‘अलार्मिंग’ यानी बेहद चिंताजनक दर से फैल रहा है। इबोला एक अत्यंत दुर्लभ लेकिन बेहद संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों (जैसे खून, उल्टी, या वीर्य) और दूषित कपड़ों या बिस्तरों के संपर्क में आने से फैलती है। इस बीमारी से होने वाला संक्रमण बहुत गंभीर और अक्सर जानलेवा होता है।

अस्पतालों के खौफ से जोखिम में गर्भवती महिलाओं की जान

पूर्वी कांगो का यह इलाका दक्षिण सूडान, युगांडा और रवांडा की सीमाओं के करीब स्थित है। सालों से जारी विद्रोही संघर्षों के कारण यहाँ की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही बदहाल स्थिति में थी। अब स्थिति यह हो गई है कि इबोला के खौफ के कारण गर्भवती महिलाएं और अन्य गंभीर मरीज स्वास्थ्य केंद्रों जाने से बच रहे हैं, जिससे उनकी जान पर दोहरा खतरा मंडरा रहा है।

देरी से घोषणा की पुरानी रही है परिपाटी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इबोला प्रकोप की देर से पहचान होना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले 2014-2016 में पश्चिम अफ्रीका में हुए भीषण इबोला प्रकोप की आधिकारिक घोषणा मार्च 2014 में की गई थी, जबकि बाद में हुई जांच में सामने आया कि पहला मानव केस दिसंबर 2013 में ही आ चुका था।

कांगो में भी फरवरी में शुरू हुए इस प्रकोप की पहचान मई में होना इस बात का प्रमाण है कि शुरुआती ढिलाई ने वायरस को बड़े पैमाने पर फैलने का मौका दे दिया।

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Sneha Sharma is a Senior Hindi Correspondent for StudioX News Canada, leading the Hindi editorial desk at hi.studioxnews.ca. She brings over three years of journalism experience across print, digital, and broadcast media in India. Her career includes roles at Jagran New Media (Her Zindagi), Zee News Hindi, TV100, Rashtriya Sahara, Amar Ujala, and Search India News, where she worked as a content writer, ground reporter, and news anchor. She holds a BA in Journalism and Mass Communication from Dev Sanskriti University, Haridwar. At StudioX News, she covers Canada immigration, community affairs, South Asia news, and diaspora stories for Hindi-speaking communities across Canada.

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