कनाडा

भारत-कनाडा संबंधों में सुधार के संकेत? जयशंकर-अनीता आनंद की बैठक ने बढ़ाई उम्मीदें

कनाडा

भारत-कनाडा संबंधों में सुधार के संकेत? जयशंकर-अनीता आनंद की बैठक ने बढ़ाई उम्मीदें

फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित आसियान (ASEAN) से जुड़ी बैठकों के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर की कूटनीतिक गतिविधियां काफी सक्रिय रहीं। इस दौरान उन्होंने कई प्रमुख देशों के विदेश मंत्रियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की।

जयशंकर ने अमेरिका, चीन, रूस, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस और सिंगापुर समेत कई देशों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया। इन मुलाकातों के दौरान व्यापार, सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता, रणनीतिक सहयोग और वैश्विक चुनौतियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

भारत के लिए आसियान से जुड़ी बैठकें रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ भारत के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए इन बैठकों को अहम मंच माना जाता है। ऐसे में जयशंकर की विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ लगातार हो रही मुलाकातें भारत की सक्रिय विदेश नीति को दर्शाती हैं।

मनीला में जयशंकर की बैठकों के दौरान अमेरिका के साथ भारत के रणनीतिक संबंधों और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग पर भी चर्चा महत्वपूर्ण रही। वहीं, चीन के साथ बातचीत क्षेत्रीय स्थिरता और दोनों देशों के बीच संबंधों के संदर्भ में अहम मानी जा रही है।

रूस के साथ भारत के लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक संबंध भी विदेश नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर जैसे देशों के साथ भारत के बढ़ते आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को देखते हुए इन देशों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत को भी खास महत्व दिया जा रहा है।

फिलीपींस के साथ बैठक भी भारत की एक्ट ईस्ट नीति और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते सहयोग के लिहाज से अहम मानी जा रही है। भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

मनीला में हुई इन बैठकों के बीच भारत-कनाडा संबंधों को लेकर भी चर्चा की संभावना बनी हुई है। कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ जयशंकर की संभावित मुलाकात को दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों में आए उतार-चढ़ाव के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा सकता है। हालांकि, किसी भी मुलाकात के एजेंडे या चर्चा के विषय को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

कुल मिलाकर, मनीला में जयशंकर की बहुपक्षीय और द्विपक्षीय बैठकों को भारत की वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता के तौर पर देखा जा रहा है। अलग-अलग देशों के साथ एक ही मंच पर बातचीत के जरिए भारत जहां अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, वहीं क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को लेकर भी अपनी भूमिका मजबूत करने पर जोर दे रहा है।

मनीला में अपने दौरे के दौरान जयशंकर ने अमेरिका, चीन और रूस समेत कई प्रमुख देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। इन मुलाकातों में आपसी संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा, वैश्विक चुनौतियों, व्यापार और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

आसियान से जुड़ी बैठकों का भारत के लिए विशेष महत्व है, क्योंकि दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ भारत के राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। ऐसे में इस मंच के जरिए भारत को क्षेत्रीय मुद्दों पर अपनी स्थिति रखने और प्रमुख देशों के साथ सीधे संवाद का अवसर मिलता है।

जयशंकर की अमेरिका के विदेश मंत्री के साथ मुलाकात को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। वहीं, चीन के साथ बातचीत ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के संबंधों में कई महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच संवाद को क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

रूस के साथ भारत के पारंपरिक और रणनीतिक संबंध भी विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। जयशंकर की रूसी समकक्ष के साथ बातचीत में दोनों देशों के बीच सहयोग और वैश्विक घटनाक्रम से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

मनीला में जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस और सिंगापुर समेत अन्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठकें कीं। इन देशों के साथ भारत के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में व्यापार, समुद्री सुरक्षा, रक्षा और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, मनीला में जयशंकर की लगातार हो रही द्विपक्षीय बैठकों से यह संकेत मिलता है कि भारत आसियान और व्यापक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक भूमिका को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। साथ ही, प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ एक ही मंच पर संवाद के जरिए भारत अपने राष्ट्रीय हितों और विदेश नीति की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

कुल मिलाकर, मनीला में जयशंकर की कूटनीतिक गतिविधियां भारत की बहुपक्षीय विदेश नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। अमेरिका, चीन और रूस जैसे प्रमुख देशों के साथ बातचीत के अलावा दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ बढ़ता संपर्क भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से अहम है।

snrhd

Sneha Sharma is a Senior Hindi Correspondent for StudioX News Canada, leading the Hindi editorial desk at hi.studioxnews.ca. She brings over three years of journalism experience across print, digital, and broadcast media in India. Her career includes roles at Jagran New Media (Her Zindagi), Zee News Hindi, TV100, Rashtriya Sahara, Amar Ujala, and Search India News, where she worked as a content writer, ground reporter, and news anchor. She holds a BA in Journalism and Mass Communication from Dev Sanskriti University, Haridwar. At StudioX News, she covers Canada immigration, community affairs, South Asia news, and diaspora stories for Hindi-speaking communities across Canada.

Follow StudioX Hindi News:

Related Stories