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होर्मुज से भारत को बड़ी राहत, 2 और पेट्रोलियम जहाज रवाना, नेवी सुरक्षा में तैनात

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भारत के लिए पेट्रोलियम लेकर जा रहे दो और व्यापारी जहाज इस समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, किसी भी जरूरत की स्थिति में मदद के लिए भारतीय नौसेना के युद्धपोत तैयार रखे गए हैं।

इलाके में सुरक्षा हालात को देखते हुए जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी गई है। फिलहाल सिर्फ कुछ जहाजों को ही आगे बढ़ने की अनुमति मिल रही है, जबकि कई जहाज अभी भी क्लियरेंस का इंतजार कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से होर्मुज में आवाजाही काफी धीमी हो गई है—कुछ जहाज निकल पाए हैं, जबकि बाकी आसपास के समुद्री क्षेत्र में रुके हुए हैं।

भारत के लिए जहाजों को मिली राहत
ईरान ने हाल ही में कुछ मित्र देशों की सूची जारी की है, जिनमें भारत, चीन और रूस शामिल हैं। इन देशों के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी गई है। इसी के तहत भारत आने वाले जहाजों को भी हाल में क्लियरेंस मिली, जिसके बाद उनकी आवाजाही शुरू हो सकी।

इस महीने की शुरुआत में एलपीजी कैरियर ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ जैसे जहाज भी इस मार्ग से गुजर चुके हैं, जिनमें से एक को रास्ते में सहायता भी मिली थी। इसके अलावा ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ नाम के टैंकर भी भारत के लिए गैस लेकर इसी रास्ते से आए हैं।

हालांकि, क्षेत्र में हालात सामान्य नहीं हैं। कई जहाजों को अभी भी इंतजार करना पड़ा, जबकि कुछ ने सुरक्षा कारणों से अपनी यात्रा में देरी की या रास्ता बदल लिया। इससे साफ है कि होर्मुज में आवाजाही अभी भी पूरी तरह सुचारू नहीं हो पाई है।

भारतीय नौसेना की कड़ी नजर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और उसके आसपास के हालात का असर जहाजों की आवाजाही पर पड़ रहा है। यहां जीपीएस में दिक्कत और समुद्री माइन्स जैसी आशंकाओं को लेकर अलर्ट जारी किए गए हैं। ऐसे में भारतीय नौसेना ने खाड़ी क्षेत्र में अपने युद्धपोत तैनात किए हैं, ताकि व्यापारी जहाजों को जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद मिल सके। अधिकारियों के मुताबिक, भारत के झंडे वाले और भारत आने वाले जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसेना पूरी तरह तैयार है।

क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से करीब 20% तेल और गैस की सप्लाई गुजरती है। इस रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट का असर पूरी दुनिया की सप्लाई पर पड़ सकता है। भारत भी अपने कच्चे तेल और गैस के बड़े हिस्से के लिए इसी मार्ग पर निर्भर है। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में भारत के लिए और भी पेट्रोलियम जहाज इस रास्ते से गुजर सकते हैं।

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