अगर आप कनाडा में पढ़ाई करने की योजना बना रहे हैं, तो आपने कई ऐसे कॉलेजों के बारे में जरूर देखा या सुना होगा, जो बड़े और प्रतिष्ठित संस्थानों के मुकाबले बेहद कम फीस में कोर्स ऑफर करने का दावा करते हैं। कई बार इनकी फीस नामी कॉलेजों की तुलना में आधी या उससे भी कम होती है। इन संस्थानों के विज्ञापन और ब्रोशर भी काफी आकर्षक होते हैं, जिनमें बेहतर करियर, आसान एडमिशन और भविष्य में स्थायी निवास (PR) तक पहुंचने के आसान रास्ते का दावा किया जाता है।
कई एजेंट भी छात्रों को जल्दी वीजा, आसान प्रवेश प्रक्रिया और कनाडा में बेहतर अवसरों का सपना दिखाकर ऐसे कॉलेजों की ओर आकर्षित करते हैं। पहली नजर में यह मौका काफी फायदेमंद लग सकता है, लेकिन हकीकत कई बार इससे अलग होती है।
शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों के मुताबिक, कनाडा में कुछ कम फीस वाले संस्थानों को “डिप्लोमा मिल” के रूप में देखा जाता है। ऐसे कॉलेजों में दाखिला लेने वाले छात्रों को भले ही डिप्लोमा मिल जाए, लेकिन उन्हें अपेक्षित शिक्षा, कौशल और करियर के अवसर नहीं मिल पाते। कई छात्रों को बाद में पता चलता है कि उनकी डिग्री या कोर्स का रोजगार बाजार में उतना महत्व नहीं है, जितना उन्होंने उम्मीद की थी।
नतीजा यह होता है कि छात्र अपनी मेहनत की कमाई, समय और करियर के महत्वपूर्ण वर्षों को गंवा सकते हैं। इसी कारण विशेषज्ञ भारतीय छात्रों को सलाह देते हैं कि कनाडा में किसी भी कॉलेज में एडमिशन लेने से पहले उसकी मान्यता, कोर्स की गुणवत्ता, रोजगार की संभावनाओं और संस्थान की प्रतिष्ठा की अच्छी तरह जांच जरूर करें।
डिप्लोमा मिल’ क्या होते हैं?
‘डिप्लोमा मिल’ ऐसे संस्थानों को कहा जाता है, जहां मुख्य उद्देश्य छात्रों को बेहतर कौशल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के बजाय केवल डिप्लोमा या सर्टिफिकेट उपलब्ध कराना होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे संस्थान शिक्षा से ज्यादा एक व्यावसायिक मॉडल की तरह काम करते हैं, जहां छात्रों को डिग्री तो मिल जाती है, लेकिन उन्हें करियर के लिए जरूरी ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव नहीं मिल पाता।
इन संस्थानों में अक्सर कुछ सामान्य कमियां देखने को मिलती हैं:
सीमित सुविधाएं: कई कॉलेजों के क्लासरूम छोटे होते हैं और वे बड़े कैंपस की बजाय शॉपिंग प्लाजा या स्ट्रिप मॉल जैसी जगहों में संचालित होते हैं।
कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर: कई जगहों पर आधुनिक लैब, लाइब्रेरी और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं की कमी होती है।
शिक्षकों की कमी: यहां फैकल्टी का बार-बार बदलना आम बात हो सकती है। कई शिक्षक पार्ट-टाइम होते हैं और उन पर काम का दबाव ज्यादा होता है।
कम प्रैक्टिकल ट्रेनिंग: कोर्स के नाम आकर्षक और आधुनिक लग सकते हैं, लेकिन उनमें छात्रों को वास्तविक दुनिया में काम आने वाली स्किल्स कम मिल पाती हैं।
PR के वादों पर ज्यादा जोर: कई बार इन संस्थानों की मार्केटिंग में नौकरी और कौशल विकास के बजाय कनाडा में स्थायी निवास (PR) हासिल करने के आसान रास्तों को ज्यादा प्रमुखता दी जाती है।
इन कॉलेजों का अस्तित्व क्यों है?
अब सवाल यह है कि ऐसे संस्थान चलते कैसे हैं और इनकी मांग क्यों बनी रहती है? इसका एक बड़ा कारण कनाडा का इंटरनेशनल एजुकेशन सेक्टर है, जहां हर साल बड़ी संख्या में विदेशी छात्र पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं।
कई छात्र सिर्फ शिक्षा ही नहीं, बल्कि पढ़ाई के साथ काम करने और भविष्य में स्थायी निवास के अवसर तलाशने के उद्देश्य से भी कनाडा आते हैं। इस वजह से ऐसे कोर्स और संस्थानों की मांग बढ़ती है, जो उन्हें कम समय और कम लागत में कनाडा पहुंचने का रास्ता दिखाते हैं।
जहां किसी क्षेत्र में मांग बहुत अधिक होती है, वहां कुछ लोग अवसर का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। कुछ संस्थान छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए काम करते हैं, जबकि कुछ केवल व्यावसायिक लाभ के लिए इस मांग का इस्तेमाल करते हैं। यही वजह है कि छात्रों को किसी भी कॉलेज में दाखिला लेने से पहले उसकी मान्यता, गुणवत्ता और भविष्य की संभावनाओं की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए।
Sneha Sharma is a Senior Hindi Correspondent for StudioX News Canada, leading the Hindi editorial desk at hi.studioxnews.ca. She brings over three years of journalism experience across print, digital, and broadcast media in India. Her career includes roles at Jagran New Media (Her Zindagi), Zee News Hindi, TV100, Rashtriya Sahara, Amar Ujala, and Search India News, where she worked as a content writer, ground reporter, and news anchor. She holds a BA in Journalism and Mass Communication from Dev Sanskriti University, Haridwar. At StudioX News, she covers Canada immigration, community affairs, South Asia news, and diaspora stories for Hindi-speaking communities across Canada.

