ग्लोबल न्यूज़ कनाडा की एक रिपोर्ट के अनुसार, अल्बर्टा में CFB Wainwright पर 17 अक्टूबर को लगी घातक आग को लेकर सेना का बयान कई सवाल खड़े करता है। सेना ने इस घटना को बेहद असामान्य बताया है, जबकि ग्लोबल न्यूज़ के सैटेलाइट और मौसम रिकॉर्ड के विश्लेषण में तस्वीर अलग नज़र आती है। इस विश्लेषण की समीक्षा सात कनाडाई वाइल्डफ़ायर विशेषज्ञों ने की है।

सेना का दावा और हताहतों की संख्या
सेना के अनुसार, प्रशिक्षण मैदान में लगी इस आग में चार सैनिकों की मौत हुई और 39 लोग घायल हुए। इनमें 19 की हालत गंभीर बताई गई है। सेना का कहना है कि बेहद तेज़ हवाओं के कारण आग अचानक फैली और लगभग एक किलोमीटर की दूरी उसने 30 से 60 सेकंड में पार कर ली।
सेना के मुताबिक, आग तेज़ी से भड़की और करीब दोपहर 4 बजे सैनिकों तक पहुंच गई। लेकिन ग्लोबल न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, सेना ने आग शुरू होने का समय भी अलग-अलग बताया है। शुरुआत में इसे करीब 4 बजे बताया गया, बाद में कहा गया कि आग कई घंटे पहले शुरू हुई थी।
मौसम की चेतावनियां और सैटेलाइट साक्ष्य
रिपोर्ट के अनुसार, एनवायरनमेंट कनाडा ने एक दिन पहले ही ठंडे मोर्चे के आने और तेज़ हवाओं का पूर्वानुमान दिया था। 17 अक्टूबर को उसने हवाओं के लिए चेतावनी जारी की। दोपहर 2:14 बजे उसने बेस वाले इलाके की चेतावनी बढ़ाई और हवा के झोंके 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने का अनुमान दिया।
सैटेलाइट तस्वीरें बताती हैं कि दोपहर 12:17 बजे तक लगभग दो किलोमीटर लंबी आग जल रही थी। विश्वविद्यालय की वाइल्डफ़ायर विशेषज्ञ जेन बेवरली के अनुमान के अनुसार, यह आग लगभग 48 हेक्टेयर में फैली थी, जो मैदानों सहित करीब 50 फुटबॉल स्टेडियमों के बराबर है। बेस के एयरफ़ील्ड पर, जो आग से लगभग 15 किलोमीटर दूर है, दोपहर 1 से 2 बजे के बीच हवा की औसत रफ़्तार 15 से बढ़कर 30 किलोमीटर प्रति घंटा हो गई, यह एनवायरनमेंट कनाडा के रिकॉर्ड में दर्ज है।
बेवरली ने कहा कि ठंडे मोर्चे, जलती हुई आग और हवा की चेतावनियों को देखते हुए इस घटना को अप्रत्याशित नहीं कहा जा सकता। मिशिगन की तरह अन्य विशेषज्ञ भी इसी राय के हैं। वाइल्डफ़ायर शोधकर्ता माइक फ़्लैनिगन ने इसे एक “क्लासिक सेटअप” बताया, यानी ऐसी स्थिति जिसके संकेत पहले से मौजूद थे।
अब भी अनुत्तरित सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि बेस नेतृत्व को खतरे का अंदाज़ा होना चाहिए था, भले ही आग की सटीक समय-सीमा या नतीजे का पूर्वानुमान न लगाया जा सकता हो। बेस के नियमों के अनुसार, रेंज कंट्रोल को दिन में दो बार, सुबह 6 बजे और शाम 6 बजे, मौसम का पूर्वानुमान मिलना चाहिए। लेकिन यह साफ़ नहीं है कि 17 अक्टूबर को मौसम पर कौन नज़र रख रहा था।
एनवायरनमेंट कनाडा ने पुष्टि की है कि उस दिन वहां कोई मौसम विशेषज्ञ तैनात नहीं था, और बेस को न्यू ब्रंसविक के CFB Gagetown से दूरस्थ पूर्वानुमान सहायता मिल रही थी। सेना के प्रवक्ता मेजर-जनरल वेड रटलैंड ने जांच का हवाला देते हुए यह बताने से इनकार किया कि बेस पर मौसम विशेषज्ञ था या नहीं। सेना का कहना है कि उसका बोर्ड ऑफ़ इंक्वायरी इन सवालों के जवाब देगा, और इसमें एक साल से अधिक समय लग सकता है।
भारतीय मूल के कनाडाई परिवारों के लिए यह मामला इसलिए अहम है कि उनके बच्चे या रिश्तेदार कनाडाई सेना में सेवा दे सकते हैं या अल्बर्टा में रहते हैं। जांच के नतीजे आने तक सेना के बयान और स्वतंत्र विश्लेषण, दोनों को ध्यान में रखना ज़रूरी है।
स्रोत: Global News Canada
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