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कनाडा में सुरक्षा पर सवाल, आतंकी की नागरिकता रद्द करने में भारी देरी

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31 मई 2001 को पूर्व पाकिस्तानी सेना कप्तान तहव्वुर हुसैन राणा ने ओटावा में एक न्यायाधीश के सामने कनाडाई नागरिकता की शपथ ली थी और आधिकारिक रूप से उन्हें कनाडा का नागरिक घोषित किया गया।

हालांकि, बाद में सामने आए सरकारी दस्तावेजों के अनुसार यह नागरिकता प्रक्रिया गंभीर सवालों के घेरे में आ गई। Global News द्वारा प्राप्त सैकड़ों पन्नों की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राणा ने “धोखाधड़ी” के जरिए नागरिकता हासिल की थी।
जांच में RCMP को ऐसे सबूत मिले कि राणा ने अपने आवेदन में गलत जानकारी दी थी। आरोप है कि उन्होंने कनाडा में रहने का झूठा दावा किया, जबकि वास्तव में वे वहां निवास नहीं कर रहे थे।

इसके बावजूद, आव्रजन अधिकारियों ने उन्हें न केवल नागरिकता दी बल्कि पासपोर्ट भी जारी किया। इसी पासपोर्ट का इस्तेमाल कर वे बाद में भारत के मुंबई गए, जहां उन पर 166 लोगों की मौत वाले एक आतंकवादी हमले की साजिश में शामिल होने के आरोप लगे।

करीब 25 साल बाद भी यह मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कनाडा की संघीय सरकार अब भी इस नागरिकता को रद्द करने और उस समय हुई कथित प्रशासनिक गलती को सुधारने की प्रक्रिया में जुटी हुई है।

IRCC ने कनाडा की संघीय अदालत में याचिका दायर कर तहव्वुर हुसैन राणा की नागरिकता रद्द करने की मांग की है। विभाग का आरोप है कि उन्होंने “गलत जानकारी और धोखाधड़ी (misrepresentation)” के आधार पर कनाडाई नागरिकता हासिल की थी।

हालांकि, यह मामला अभी भी अदालत में लंबित है और अब तक इसका कोई अंतिम फैसला नहीं आया है। फिलहाल तहव्वुर राणा भारत में भी मुकदमे का सामना कर रहे हैं, जहां उन पर दुनिया के सबसे घातक आतंकी साजिशों में से एक में अहम भूमिका निभाने के आरोप हैं। इसके बावजूद वे अभी भी तकनीकी रूप से कनाडा के नागरिक बने हुए हैं।

IRCC ने नागरिकता रद्द करने के मामलों की “प्रोसेसिंग टाइमलाइन” या किसी व्यक्तिगत केस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। हालांकि Global News की एक जांच में सामने आया है कि 1 जनवरी 2024 के बाद से संघीय अदालत ने ऐसे कम से कम 11 मामलों को संभाला है।
रिपोर्ट के अनुसार, लगभग हर मामले में जांच शुरू होने से लेकर नागरिकता रद्द होने तक का समय औसतन 10 साल या उससे अधिक पाया गया है। कई मामले अभी भी अदालत में लंबित हैं और उनका अंतिम निपटारा नहीं हो सका है।

इन मामलों में सबसे कम समय जिस केस में लगा, वह एक फिलीपींस मूल के व्यक्ति से जुड़ा था, जिसने कथित तौर पर फर्जी नाम के आधार पर कनाडाई नागरिकता हासिल की थी। उस व्यक्ति की नागरिकता रद्द करने की पूरी प्रक्रिया को लगभग 8 साल लगे। बाद में 2024 में उसके द्वारा दायर की गई कानूनी चुनौती भी खारिज कर दी गई, लेकिन उससे जुड़ी अतिरिक्त सुनवाई और प्रक्रिया में लगभग एक साल और लग गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि कनाडाई नागरिकता हासिल करना एक अपेक्षाकृत सरल प्रक्रिया है, जिसे हर साल लाखों लोग पूरा करते हैं। लेकिन जिन मामलों में धोखाधड़ी या गलत जानकारी के आधार पर नागरिकता दी गई हो, उसे रद्द करने की प्रक्रिया बेहद जटिल और लंबी होती है।

Global News की एक समीक्षा के अनुसार, पिछले दो वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें अदालत में नागरिकता रद्द करने की प्रक्रिया को पूरा होने में औसतन एक दशक से भी अधिक समय लग जाता है। यह स्थिति कनाडा की नागरिकता प्रणाली और उसकी कानूनी प्रक्रिया की धीमी गति पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

snrhd

Sneha Sharma is a Senior Hindi Correspondent for StudioX News Canada, leading the Hindi editorial desk at hi.studioxnews.ca. She brings over three years of journalism experience across print, digital, and broadcast media in India. Her career includes roles at Jagran New Media (Her Zindagi), Zee News Hindi, TV100, Rashtriya Sahara, Amar Ujala, and Search India News, where she worked as a content writer, ground reporter, and news anchor. She holds a BA in Journalism and Mass Communication from Dev Sanskriti University, Haridwar. At StudioX News, she covers Canada immigration, community affairs, South Asia news, and diaspora stories for Hindi-speaking communities across Canada.

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