दुनियाभर में बढ़ती महंगाई और बेहतर जीवन स्तर की जरूरतों के बीच न्यूनतम मजदूरी एक बड़ा मुद्दा बन गया है। भारत में भी कम वेतन और बढ़ती कीमतों को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी देखने को मिल रही है। नोएडा सहित कई जगहों पर फैक्ट्री वर्कर्स ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया है।
इसी बीच कनाडा सरकार ने अपने कर्मचारियों को राहत देते हुए न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी की घोषणा की है। अब सवाल यह है कि कनाडा में फैक्ट्री वर्कर्स की कमाई कितनी है और भारत की तुलना में यह कितनी अधिक है।
कनाडा में न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी
कनाडा में 1 अप्रैल 2026 से फेडरल न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 18.15 कनाडाई डॉलर प्रति घंटा कर दिया गया है। इससे पहले यह दर 17.75 डॉलर प्रति घंटा थी, यानी इसमें 40 सेंट (लगभग 2.4 प्रतिशत) की वृद्धि की गई है।
यह बढ़ोतरी महंगाई दर को ध्यान में रखते हुए की गई है, ताकि कर्मचारियों की आय बढ़ती लागत के अनुरूप बनी रहे। यह नया वेतन मुख्य रूप से बैंकिंग, टेलीकॉम, एविएशन और इंटर-प्रोविंशियल ट्रांसपोर्ट जैसे फेडरल सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों पर लागू होगा।
भारत के मुकाबले कितना अंतर?
अगर भारत से तुलना की जाए तो यहां फैक्ट्री वर्कर्स की न्यूनतम कमाई काफी कम है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बिना अनुभव वाले मजदूरों को लगभग 11,000 से 13,000 रुपये प्रति माह वेतन मिलता है। वहीं अनुभवी कर्मचारियों की सैलरी भी एक सीमित दायरे में ही रहती है।
दैनिक मजदूरी की बात करें तो भारत में यह करीब 400 से 500 रुपये प्रतिदिन के आसपास होती है। इसके विपरीत कनाडा में वेतन प्रति घंटे के हिसाब से दिया जाता है, जो भारत की तुलना में कई गुना अधिक है। इसी वजह से कुल आय के स्तर पर कनाडा में मजदूरी भारत से काफी ज्यादा मानी जाती है।
कनाडा में सैलरी ज्यादा क्यों है?
कनाडा में श्रमिकों को अधिक वेतन मिलने के पीछे कई कारण हैं। यहां जीवन यापन की लागत काफी अधिक है, इसलिए वेतन भी उसी हिसाब से तय किया जाता है। इसके अलावा कनाडा की अर्थव्यवस्था मजबूत है और श्रम कानून भी सख्ती से लागू किए जाते हैं।
सबसे अहम बात यह है कि वहां महंगाई के अनुसार समय-समय पर न्यूनतम वेतन में संशोधन किया जाता है, जिससे कर्मचारियों की आय और खर्च के बीच संतुलन बना रहे। यही कारण है कि कनाडा में मजदूरी भारत की तुलना में काफी अधिक है।

Leave a Comment