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कनाडा: 16 लोगों की जान लेने वाले भारतीय ट्रक ड्राइवर को राहत, डिपोर्टेशन फिलहाल टला

कनाडा में साल 2018 में हुई दर्दनाक हम्बोल्ट ब्रोंकोस बस हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराए गए भारतीय मूल के ट्रक ड्राइवर जसकिरत सिंह सिद्धू के मामले में एक नया मोड़ आया है। संघीय अदालत ने उनके डिपोर्टेशन पर फिलहाल अस्थायी रोक लगा दी है, जिससे उन्हें कुछ समय के लिए राहत मिल गई है।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब उनके निर्वासन को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ रही थी। अदालत अब मामले से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा कर रही है, जिसमें कानूनी दलीलें और मानवीय आधार पर पेश किए गए पक्ष भी शामिल हैं। इस बीच, यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है और आगे की सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

यह पूरा मामला 6 अप्रैल 2018 को हुई उस भयावह सड़क दुर्घटना से जुड़ा है, जिसने पूरे कनाडा को झकझोर कर रख दिया था। उस दिन सस्केचेवान प्रांत में जूनियर हॉकी टीम हम्बोल्ट ब्रोंकोस खिलाड़ियों को लेकर जा रही बस की एक सेमी-ट्रक से जोरदार टक्कर हो गई थी। टक्कर इतनी भीषण थी कि घटनास्थल पर ही कई लोगों की जान चली गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

इस हादसे ने न केवल खेल जगत बल्कि पूरे देश को गहरे सदमे में डाल दिया था। पीड़ितों के परिवारों और समुदाय पर इसका गहरा असर पड़ा, और यह घटना कनाडा के सबसे दुखद सड़क हादसों में से एक के रूप में याद की जाती है।

शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान संघीय अदालत में इस मामले पर विस्तार से बहस हुई। इस दौरान न्यायाधीश ने जसकिरत सिंह सिद्धू की ओर से दायर याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।

सिद्धू के वकीलों ने अदालत से गुहार लगाई कि उनके मुवक्किल को तुरंत डिपोर्ट न किया जाए और मामले की पूरी तरह से समीक्षा होने तक उन्हें कनाडा में ही रहने की अनुमति दी जाए। उन्होंने यह भी दलील दी कि इस फैसले के मानवीय और कानूनी दोनों पहलुओं पर विचार किया जाना जरूरी है।

अदालत ने इन तर्कों को गंभीरता से लेते हुए मामले को आगे की सुनवाई के लिए रखा है और तब तक के लिए डिपोर्टेशन प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगा दी है।

गौरतलब है कि जसकिरत सिंह सिद्धू को जनवरी 2019 में अदालत ने आठ साल की जेल की सजा सुनाई थी। इससे पहले उन्होंने कुल 29 आरोपों में अपनी गलती स्वीकार की थी, जिनमें खतरनाक तरीके से वाहन चलाने के कारण मौत और गंभीर चोट पहुंचाने जैसे गंभीर मामले शामिल थे।

उनकी स्वीकारोक्ति के बाद अदालत ने इस दर्दनाक हादसे की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए सख्त सजा सुनाई थी। इस दुर्घटना में कई लोगों की जान गई थी और कई अन्य घायल हुए थे, जिसके चलते यह मामला कनाडा के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में गिना जाता है।

सिद्धू की ओर से पेश हुए वकीलों ने अदालत में यह तर्क रखा कि अगर उन्हें डिपोर्ट किया जाता है, तो इसका उनके परिवार पर गहरा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सिद्धू के छोटे-छोटे बच्चे हैं, जिनकी परवरिश और देखभाल इस फैसले से प्रभावित हो सकती है।

वकीलों के मुताबिक, परिवार पहले ही इस मामले की वजह से कई मुश्किलों का सामना कर चुका है और अब डिपोर्टेशन की स्थिति उनके लिए और भी गंभीर हालात पैदा कर सकती है। उन्होंने अदालत से मानवीय आधार पर विचार करने की अपील करते हुए कहा कि इस फैसले का असर सिर्फ सिद्धू पर ही नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार पर पड़ेगा।

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