Iran US War: ईरान युद्ध के दौरान अब चीन और अमेरिका भी समंदर में जहाजों के रोके जाने के मुद्दे को लेकर टकराव की स्थिति में आ गए हैं। चीन ने समंदर में पनामा के ध्वजों वाले जहाजों का रास्ता रोक कर उन्हें हिरासत में ले लिया है। इससे अमेरिका बौखला गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार को इस घटना को लेकर चीन को खूब खरी-खोटी सुनाई और बीजिंग पर “धमकाने” का आरोप लगाया।
रूबियो ने चीन पर लगाए गंभीर आरोप
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन द्वारा जहाजों को रोकने के मामले में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस साल की शुरुआत में पनामा ने अपने दो बड़े बंदरगाहों का नियंत्रण हांगकांग की एक कंपनी से वापस ले लिया था, जिसके बाद चीन ने पनामा के झंडे वाले कई जहाजों को कुछ समय के लिए रोक लिया। हालांकि, चीन ने इन आरोपों को नकार दिया है। अब पनामा अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव के बीच फंस गया है।
पनामा नहर क्यों है अहम?
अमेरिका के लिए पनामा नहर व्यापार और सैन्य दोनों लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। ट्रंप प्रशासन भी इसे काफी अहम मानता रहा है।
रूबियो ने कहा कि चीन की इस कार्रवाई से सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है, लागत बढ़ सकती है और वैश्विक व्यापार पर भरोसा कम हो सकता है। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका पनामा के साथ खड़ा है और किसी भी तरह की दबाव की राजनीति का विरोध करेगा।
मार्च में बढ़ी जहाजों की रोक-टोक
आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने में चीन के बंदरगाहों पर 124 जहाजों को जांच के लिए रोका गया, जिनमें से करीब 92 जहाज पनामा के झंडे वाले थे। इन जहाजों को आमतौर पर 1 से 10 दिनों तक रोके रखने के बाद छोड़ दिया गया।
यह संख्या पहले के महीनों की तुलना में काफी ज्यादा है। फरवरी में 45 में से 19 और जनवरी में 71 में से 23 जहाज पनामा के झंडे वाले थे।
इस मुद्दे पर चीन ने अमेरिका के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका बार-बार गलत आरोप लगाकर खुद पनामा नहर पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, चीन ने जहाजों की बढ़ती संख्या पर कोई साफ जवाब नहीं दिया।

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