अप्रैल की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए किसी डरावने सपने जैसी रही है। निवेशक नए वित्त वर्ष से उम्मीदें लगाए बैठे थे, लेकिन विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने बड़ी रकम निकालकर बाजार में हलचल मचा दी है। केवल दो कारोबारी दिनों में ही उन्होंने ₹19,837 करोड़ (लगभग 2.1 अरब डॉलर) की भारी निकासी की।
यह अचानक हुई घटना नहीं है। मार्च में विदेशी निवेशकों ने पहले ही रिकॉर्ड ₹1.17 लाख करोड़ बाहर निकाले थे, जो भारतीय बाजार के इतिहास में सबसे बड़ी बिकवाली थी। साल 2026 की शुरुआत से अब तक कुल ₹1.5 लाख करोड़ का फंड आउटफ्लो हो चुका है। फरवरी में स्थिति थोड़ी बेहतर थी, लेकिन वैश्विक हालात ने फिर से बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है।
शी निवेशकों के भारत से पैसा निकालने के 3 बड़े कारण
पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। ऐसे समय में लोग जोखिम भरे बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित जगहों पर निवेश करना पसंद करते हैं।
कच्चे तेल का दाम $100 के ऊपर पहुंच गया है। चूंकि भारत अधिकांश तेल आयात करता है, महंगा तेल अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार दोनों पर दबाव डालता है।
डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिर रहा है। युद्ध के चलते अब तक यह लगभग 4% कमजोर हो चुका है, जिससे विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश घाटे वाला नजर आता है।

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