पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट फ्रीज किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट 13 अप्रैल को सुनवाई करेगा। राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव दो चरणों में आयोजित होंगे और पहले चरण की सभी 152 सीटों के लिए मतदाता सूची पर रोक लगा दी गई है।
चुनाव आयोग के इस फैसले को चुनौती देते हुए कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं। अदालत ने इन सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करने का निर्णय लिया है।
राज्य में मतदान 23 और 29 अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी।
मतदाता सूची को फ्रीज करने का अर्थ है कि जिन लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, उन्हें इस विधानसभा चुनाव में दोबारा शामिल नहीं किया जा सकेगा।
इस मामले को लेकर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष एक वकील ने तत्काल सुनवाई की मांग की। वकील का कहना था कि कई ऐसे मामले अभी लंबित हैं, जिनमें मतदाता सूची से नाम हटाने को चुनौती दी गई है, जबकि चुनाव आयोग ने 9 अप्रैल को ही सूची को फ्रीज कर दिया।
इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत इस याचिका पर 13 अप्रैल को सुनवाई करेगी।
चुनाव आयोग की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी. एस. नायडू ने दलील दी कि मतदाता सूची को फ्रीज करने की अंतिम तारीख 9 अप्रैल तय की गई थी और इसके बाद दाखिल याचिकाओं पर विचार संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अपीलकर्ताओं का मतदान का अधिकार बना हुआ है और उनकी स्थिति उन लोगों जैसी ही है, जिनकी अपीलें पहले ही स्वीकार की जा चुकी हैं।
इस दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत इस प्रक्रिया की संरचना पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में एक निश्चित सीमा तय होती है, लेकिन इसके केंद्र में मतदाता सूची में नाम शामिल होना और मतदान का संवैधानिक अधिकार है, जो कहीं अधिक अहम और स्थायी है।

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