कनाडा में एक बार फिर गैंगवार से जुड़ी घटना सामने आई है, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आ रहा है। गैंग की ओर से कथित तौर पर एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए फायरिंग की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया है। यह पोस्ट ‘मुन्ना ब्रैम्पटन’ नाम के एक व्यक्ति के अकाउंट से शेयर की गई बताई जा रही है, जिसमें घटना से जुड़ा एक वीडियो भी पोस्ट किया गया है।
हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है और इसकी सच्चाई की आधिकारिक तौर पर जांच की जा रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस पोस्ट में लिखा गया है कि ब्रैम्पटन इलाके में ‘प्रोस्टार टोइंग’ से जुड़े एक व्यक्ति के घर पर हुई फायरिंग के पीछे वही और लॉरेंस बिश्नोई ग्रुप जिम्मेदार हैं।
पोस्ट में आगे यह भी कहा गया है कि संबंधित व्यक्ति उनके विरोधियों का समर्थन करता है, और जो भी उनके खिलाफ जाएगा, उसे इसी तरह के अंजाम का सामना करना पड़ेगा। साथ ही, इसमें धमकी भरे लहजे में आगे और घटनाओं की चेतावनी भी दी गई है।
फिलहाल, इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय एजेंसियां सतर्क हैं और मामले की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे ऑनलाइन दावों को गंभीरता से लिया जा रहा है और सच्चाई का पता लगाने के लिए सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े एक व्यक्ति ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें कथित तौर पर फायरिंग की घटना दिखाई जा रही है। वीडियो रात के समय का बताया जा रहा है, जिसमें अंधेरे के बीच एक कार के पास गोलियों की आवाजें सुनाई देती हैं और कुछ चमकती रोशनी भी नजर आती है। दावा किया जा रहा है कि यह घटना कनाडा के ब्रैम्पटन इलाके से जुड़ी है। हालांकि, इस वीडियो और दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।
बताया जा रहा है कि यह पोस्ट ‘मुन्ना ब्रैम्पटन’ नाम के अकाउंट से शेयर की गई, जिसे गैंग से जुड़ा बताया जाता है। इसके साथ किए गए दावे में फायरिंग की जिम्मेदारी लेने की बात कही गई है। हालांकि, इस तरह के सोशल मीडिया पोस्ट की सच्चाई को लेकर एजेंसियां सतर्क रहती हैं और हर पहलू की जांच की जाती है।
यह पहली बार नहीं है जब इस तरह के दावे सामने आए हैं। करीब एक महीने पहले भी कनाडा में एक शोरूम पर फायरिंग की घटना सुर्खियों में आई थी, जिसका जिम्मेदारी लेने का दावा भी इसी नाम से जुड़े व्यक्ति ने किया था। उस समय भी शोरूम मालिक पर विरोधियों का समर्थन करने का आरोप लगाया गया था, लेकिन उस दावे की भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।
ताजा मामले में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। एक बार फिर फायरिंग की घटना को लेकर सोशल मीडिया पर दावे किए जा रहे हैं, जिनकी सच्चाई की जांच जारी है। स्थानीय प्रशासन ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए तथ्यों की पुष्टि करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर ध्यान दे रहा है।