कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में चल रहे अलगाववादी आंदोलन को हाल ही में बड़ा कानूनी झटका लगा है। अदालत ने उस याचिका पर रोक लगा दी है, जिसमें अल्बर्टा को कनाडा से अलग करने की मांग की गई थी। इस फैसले को अलगाव समर्थकों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
न्यायालय ने शुरुआती सुनवाई में ही यह स्पष्ट कर दिया कि इस तरह की याचिका को संवैधानिक और कानूनी आधार पर गंभीरता से परखा जाएगा और फिलहाल इसे आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत के इस रुख के बाद आंदोलन से जुड़े समूहों की रणनीति पर भी सवाल उठने लगे हैं।
इस बीच कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी बयान देते हुए कहा कि देश का भविष्य एकजुटता में ही बेहतर है और किसी भी प्रकार के विभाजनकारी प्रयासों को समर्थन नहीं दिया जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि कनाडा की स्थिरता और विकास उसकी एकता पर निर्भर करता है।
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि उनकी सरकार का मुख्य ध्यान पूरे देश के सुचारू संचालन और सभी प्रांतों के साथ मिलकर काम करने पर केंद्रित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार का उद्देश्य किसी भी क्षेत्र को अलग करके देखने का नहीं, बल्कि सभी हिस्सों को साथ लेकर आगे बढ़ने का है।
कार्नी ने कहा कि कनाडा जैसे विविधता वाले देश में मजबूत संघीय ढांचा ही स्थिरता और विकास की नींव है। ऐसे में उनकी सरकार सभी प्रांतों के साथ संवाद और सहयोग को प्राथमिकता दे रही है, ताकि हर क्षेत्र की जरूरतों को समझकर संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि किसी भी तरह की विभाजनकारी सोच या अलगाववादी गतिविधियों के बजाय सरकार का पूरा जोर राष्ट्रीय एकता, आर्थिक मजबूती और सार्वजनिक हित से जुड़े मुद्दों पर रहेगा।
दरअसल, अल्बर्टा प्रांत में सक्रिय अलगाववादी संगठन “स्टे फ्री अल्बर्टा” ने एक याचिका दायर की थी, जिसमें प्रांत को कनाडा से अलग करने के लिए जनमत संग्रह (रेफरेंडम) कराए जाने की मांग की गई थी। संगठन का तर्क था कि अल्बर्टा को अधिक स्वायत्तता मिलनी चाहिए और इसके भविष्य का फैसला वहां की जनता को सीधे तौर पर करना चाहिए।
इस याचिका के जरिए समूह ने कानूनी प्रक्रिया के तहत अलगाव की दिशा में कदम बढ़ाने की कोशिश की थी, लेकिन अदालत ने शुरुआती स्तर पर ही इस मांग पर रोक लगा दी। न्यायिक हस्तक्षेप के बाद अब इस मामले पर आगे की सुनवाई और संवैधानिक पहलुओं की जांच की संभावना बनी हुई है, जिससे साफ है कि यह मुद्दा फिलहाल कानूनी और राजनीतिक बहस के दायरे में ही सीमित रहेगा।
फैसले के बाद अल्बर्टा की प्रीमियर डेनिएल स्मिथ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे “लोकतंत्र विरोधी” बताया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अदालत के इस निर्णय को लेकर गंभीर चिंता में है, क्योंकि उनके अनुसार यह कदम जनता की राय और लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ जाता है।
स्मिथ ने आगे संकेत दिया कि उनकी सरकार इस मुद्दे पर अपना पक्ष मजबूती से रखेगी और कानूनी तथा राजनीतिक स्तर पर आवश्यक कदम उठाने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अल्बर्टा के लोगों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और किसी भी बड़े फैसले में जनता की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
इस बयान के बाद प्रांत में राजनीतिक बहस और तेज हो गई है, और अलगाववादी मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
Sneha Sharma is a Senior Hindi Correspondent for StudioX News Canada, leading the Hindi editorial desk at hi.studioxnews.ca. She brings over three years of journalism experience across print, digital, and broadcast media in India. Her career includes roles at Jagran New Media (Her Zindagi), Zee News Hindi, TV100, Rashtriya Sahara, Amar Ujala, and Search India News, where she worked as a content writer, ground reporter, and news anchor. She holds a BA in Journalism and Mass Communication from Dev Sanskriti University, Haridwar. At StudioX News, she covers Canada immigration, community affairs, South Asia news, and diaspora stories for Hindi-speaking communities across Canada.

