प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि वह अपना कर्तव्य छोड़ चुका है और ‘विरोध पक्ष’ से ‘अवरोध पक्ष’ बन गया है। हिंदुस्तान टाइम्स इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मोदी ने यह बात एकता नगर में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास परेड ग्राउंड पर कही, जहां वे सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के कार्यक्रम में बोल रहे थे।

‘यह विरोध नहीं, अवरोध है’
रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष हताशा और निराशा में देश के विकास के रास्ते में रुकावट बन रहा है। उन्होंने कहा, “यह विरोध नहीं है, यह अवरोध है।” मोदी का आरोप था कि विपक्ष ने इसे अपनी राजनीति का हिस्सा बना लिया है और वह संविधान की गरिमा को तार-तार करने में लगा है।
उन्होंने कहा कि संविधान बनाते समय सरदार पटेल, बाबासाहेब आंबेडकर और अन्य महान हस्तियों ने सत्ता पक्ष और विपक्ष की व्यवस्था तय की थी। मोदी के अनुसार लोकतंत्र में विपक्ष का काम सरकार की नीतियों को चुनौती देना है।
प्रधानमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि ये ताकतें देश को बांटने की साजिशों में लगातार जुटी हैं। उनके अनुसार, एक दशक से ज्यादा की हताशा और निराशा के कारण वे अब खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने कहा कि विदेश में कौन किससे गुपचुप मिल रहा है, कौन-सी भारत-विरोधी ताकतें किसका समर्थन कर रही हैं और कौन भारत के दुश्मनों की भाषा बोल रहा है, इन पैटर्न को पहचानना होगा और एकजुट होकर इनका सामना करना होगा।
‘दिमागी नक्सल’ और सोशल मीडिया पर चेतावनी
मोदी ने कहा कि सोशल मीडिया को हथियार की तरह इस्तेमाल कर ‘भारत की छवि धूमिल’ की जा रही है। नक्सलवाद पर उन्होंने कहा कि दूर-दराज के इलाकों से इसे खत्म कर दिया गया है, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ का खतरा अब भी देश पर मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि देश को इन वैचारिक नक्सलियों के प्रति हमेशा सतर्क रहना होगा।
गरीबी के आंकड़ों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि जिन्होंने कभी ‘गरीबी हटाओ’ का नारा दिया, वे खुद अमीर होते गए। उनके मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में हालात बदलने लगे। मोदी ने कहा कि कुछ दिन पहले जारी विश्व बैंक की एक रिपोर्ट संकेत देती है कि 2024 से पहले के दस से बारह वर्षों में 50 करोड़ भारतीयों ने गरीबी को मात दी।
सरदार पटेल को श्रद्धांजलि
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने आजादी के बाद 550 से ज्यादा रियासतों को जोड़ने और अपने दृढ़ संकल्प से देश को एकता के सूत्र में पिरोने के लिए पटेल को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और एकता दिवस अब तीनों राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाए जाते हैं।
पटेल के सांस्कृतिक योगदान पर मोदी ने कहा कि उन्होंने सिर्फ देश का भूगोल नहीं जोड़ा, बल्कि राष्ट्र को भावनात्मक एकता के सूत्र में भी बांधा। उन्होंने कहा कि गुजरात में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के जरिए पटेल ने देश के सांस्कृतिक पुनरुत्थान की शुरुआत की थी।
मोदी के अनुसार, जिस तरह सोमनाथ मंदिर का ध्वज हजार वर्षों से सभी आततायियों के इरादों को चुनौती देते हुए पूरे स्वाभिमान से लहरा रहा है, उसी स्वाभिमान ने ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के लिए प्रेरित किया।
Source: Hindustan Times India
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