हिंदुस्तान टाइम्स इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 19 विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक प्रतीकात्मक सार्वजनिक ‘महाभियोग’ आयोजित किया। इसमें उनकी तत्काल बर्खास्तगी की मांग वाला प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ। भाजपा ने पूरे आयोजन को ‘ड्रामा’ बताया है।

कहां और कैसे हुआ आयोजन
यह कार्यक्रम दिल्ली के राजाजी मार्ग पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर शाम 4 बजे के बाद शुरू हुआ। करीब साढ़े तीन घंटे चले इस आयोजन में 250 से ज्यादा विपक्षी सांसद शामिल हुए। शाम 7.05 बजे ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से अपनाया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक कई वक्ताओं ने कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य पर निशाना साधा। मुद्दे थे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), कथित बड़े पैमाने पर मताधिकार हनन और संसद की जानकारी के बिना फॉर्म 6 में कथित बदलाव। रिपोर्ट के अनुसार, नकली संसद जैसे मंच जनहित के मुद्दे उठाने के लिए आम हैं, पर संवैधानिक पद पर बैठे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ ऐसे प्रतीकात्मक आयोजन का यह पहला मामला है।
पांच सूत्री प्रस्ताव में आरोप
प्रस्ताव में कहा गया कि INDIA गठबंधन देश की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और संविधान के अनुच्छेद 326 में दिया गया सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार मुख्य चुनाव आयुक्त के कदमों से गंभीर खतरे में है। विपक्ष ने ये आरोप लगाए:
- कुमार ने भाजपा द्वारा रचित कथित आपराधिक साजिश की निगरानी की और उसमें हिस्सा लिया, ताकि राष्ट्रीय और राज्य चुनाव चुराए जा सकें।
- उन्होंने भाजपा को मतदाता सूची तक पहुंच देकर मनमाने ढंग से नाम जोड़ने-हटाने की छूट दी।
- वे SIR को पक्षपाती, अपारदर्शी और प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन वाले तरीके से कराने के जिम्मेदार हैं।
- उन्होंने फॉर्म 6 में बदलाव कर पहली बार वोट देने वालों का पंजीकरण रोकने की साजिश की।
- उन्होंने मतदाता सूची का नियंत्रण अवैध रूप से केंद्रीकृत किया, ERONET/ECINET सॉफ्टवेयर का दुरुपयोग किया और बाकी दोनों चुनाव आयुक्तों को फैसलों से बाहर रखा।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि कुमार के कई परिजनों को अच्छी पोस्टिंग और कमाई के असाधारण अवसर मिले। विपक्ष ने इसे देश और संविधान के खिलाफ ‘राजद्रोह’ बताया और अदालत में मुकदमा चलाने की मांग की।
खड़गे और राहुल गांधी के बयान
बहस की शुरुआत करते हुए खड़गे ने कहा कि प्रस्ताव का मकसद एक संवैधानिक संस्था की गरिमा बचाना है और कुमार से कोई निजी दुश्मनी नहीं है। उनके अनुसार, हाशिये के वर्गों, महिलाओं और युवाओं के वोट दिल्ली में बैठे किसी व्यक्ति द्वारा कंप्यूटर से चुपचाप नहीं हटाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि मृत लोगों के नाम सूची में रखने की वकालत कोई नहीं कर रहा, लेकिन ऐसे लोगों की सटीक संख्या का आंकड़ा दिया जाना चाहिए। उन्होंने मोदी सरकार पर ‘वोट चोरी’ का आरोप भी लगाया।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने समापन भाषण में कहा कि विपक्ष के पास जाने के लिए कोई और जगह नहीं बची है। उन्होंने दावा किया कि हर सात में से एक भारतीय का वोट हटा दिया गया, जिसका मतलब है कि 2024 का चुनाव अवैध था। उन्होंने यह भी कहा कि कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर टिक नहीं पाएंगे। ये सभी दावे विपक्षी नेताओं के हैं।
भाजपा का पलटवार
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस से पांच सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि 2014 में कांग्रेस के सिर्फ 44 सांसद क्यों आए, जबकि चुनाव आयुक्त उसकी सरकार ने नियुक्त किए थे। उन्होंने यह भी पूछा कि 2024 में ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे, तब कांग्रेस की हैट्रिक हार कैसे हुई। उनका एक सवाल यह था कि क्या अवैध प्रवासियों, मृत, स्थानांतरित और दोहरे नामों को सूची से हटाया जाना चाहिए। उन्होंने पूछा कि क्या 1952 से 2004 के बीच हुए पुनरीक्षण भी अवैध थे।
भाजपा सांसद संबित पात्रा ने प्रेस वार्ता में कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी लोकतंत्र के स्तंभों का मजाक बना रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वोट चुराने का पहला उदाहरण नेहरू ने पेश किया था।
Source: Hindustan Times India
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