राजनीति

कनाडा में कार्नी की सरकार मजबूत, बहुमत मिलने से संसद में विपक्ष की भूमिका हुई कमजोर

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी के बाद, जिसमें उन्होंने कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कही थी, कनाडा में राजनीतिक माहौल काफी गरम हो गया। इस विवाद ने कनाडाई जनता और नेताओं को एकजुट कर दिया, जिसका सीधा फायदा प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की सरकार को मिला।

विशेष चुनावों में कार्नी की लिबरल पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो अतिरिक्त सीटें जीत लीं और अब हाउस ऑफ कॉमंस में उसकी कुल सीटें 173 हो गई हैं। इसके साथ ही मार्क कार्नी ने सोमवार रात बहुमत हासिल कर अपनी सरकार को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया है।

इस जीत के बाद अब लिबरल पार्टी को संसद में विपक्षी दलों के समर्थन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और सरकार अपने दम पर कानून पारित कर सकेगी।

मतदाताओं ने देशभर के 343 संसदीय क्षेत्रों में से तीन खाली सीटों के लिए मतदान किया। टोरंटो में लिबरल पार्टी के उम्मीदवार डैनियल मार्टिन ने यूनिवर्सिटी–रोजडेल सीट पर जीत दर्ज की, जबकि डाली बेगम ने स्कारबोरो साउथवेस्ट से सफलता हासिल की।

क्यूबेक के एक बेहद करीबी मुकाबले वाले क्षेत्र का परिणाम अभी घोषित नहीं हुआ है और उसके बाद आने की उम्मीद है। सोमवार के नतीजों के बाद लिबरल पार्टी की स्थिति और मजबूत हो गई है, जिससे माना जा रहा है कि वह 2029 तक सत्ता में अपनी पकड़ बनाए रख सकती है।

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने पिछले वर्ष कनाडा का चुनाव उस समय जीता, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से कथित अधिग्रहण संबंधी बयानों के खिलाफ देश में भारी जन आक्रोश देखने को मिला। कार्नी ने उस दौरान यह भरोसा दिलाया था कि उनकी सरकार कनाडा की अमेरिका पर निर्भरता को घटाने पर काम करेगी।

इसके बाद राजनीतिक घटनाक्रम में कई बदलाव देखने को मिले, जिसमें विपक्षी दलों से पांच अलग-अलग बगावतें शामिल रहीं। इनमें से चार बगावतें मुख्य विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी के भीतर हुईं, जिससे लिबरल पार्टी की स्थिति और मजबूत होती चली गई और वह बहुमत के करीब पहुंच गई। इनमें से एक नेता ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच पर कार्नी के भाषण को अपने फैसले का कारण बताया।

उस भाषण में कार्नी ने बड़ी शक्तियों द्वारा छोटे देशों पर डाले जा रहे आर्थिक दबाव की कड़ी आलोचना की थी, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहा गया। बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ कनाडा के पूर्व प्रमुख रह चुके कार्नी ने 2025 में जस्टिन ट्रूडो के बाद प्रधानमंत्री पद संभाला और तब से उन्होंने लिबरल पार्टी को अपेक्षाकृत अधिक केंद्र-दक्षिणपंथी रुख की ओर मोड़ा है।

snrhd

Sneha Sharma is a Senior Hindi Correspondent for StudioX News Canada, leading the Hindi editorial desk at hi.studioxnews.ca. She brings over three years of journalism experience across print, digital, and broadcast media in India. Her career includes roles at Jagran New Media (Her Zindagi), Zee News Hindi, TV100, Rashtriya Sahara, Amar Ujala, and Search India News, where she worked as a content writer, ground reporter, and news anchor. She holds a BA in Journalism and Mass Communication from Dev Sanskriti University, Haridwar. At StudioX News, she covers Canada immigration, community affairs, South Asia news, and diaspora stories for Hindi-speaking communities across Canada.

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