ईरान फुटबॉल फेडरेशन के अध्यक्ष मेहदी ताज को कनाडा पहुंचने के कुछ ही घंटों के भीतर वहां से वापस लौटा दिया गया। इस घटना ने दोनों देशों के बीच एक नया विवाद खड़ा कर दिया है और इसे लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, ताज की एंट्री पहले मंजूर कर ली गई थी, लेकिन कनाडा पहुंचने के बाद अधिकारियों ने अचानक अपना फैसला बदलते हुए उन्हें देश में प्रवेश की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्हें तत्काल वापस भेज दिया गया।
न्यूज वेबसाइट “ईरान इंटरनेशनल” की एक रिपोर्ट में कनाडा के एक सरकारी सूत्र के हवाले से बताया गया है कि यह फैसला सुरक्षा और नीतिगत कारणों के चलते लिया गया। हालांकि, इस पर आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने कनाडा की इमिग्रेशन नीति और ईरान से जुड़े मामलों को लेकर उसके रुख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, ईरान की ओर से भी इस फैसले पर नाराजगी जताए जाने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सिर्फ खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक तनाव भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
मेहदी ताज और उनके साथ पहुंचे दो अन्य व्यक्तियों को शुरुआत में कनाडा में दाखिल होने की इजाजत दे दी गई थी। बताया जाता है कि इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें अस्थायी रूप से देश में रहने के लिए टेंपरेरी रेजिडेंस परमिट (TRP) भी जारी किया था, जिससे वे सीमित अवधि तक कनाडा में ठहर सकते थे।
सूत्रों के अनुसार, यह परमिट खास परिस्थितियों में दिया जाता है, जब किसी व्यक्ति को सामान्य नियमों से अलग रखते हुए अस्थायी तौर पर प्रवेश की अनुमति दी जाती है। ताज और उनके साथियों के मामले में भी शुरुआती स्तर पर यही प्रक्रिया अपनाई गई थी।
हालांकि, बाद में हालात अचानक बदल गए और अधिकारियों ने अपने पहले के फैसले पर पुनर्विचार करते हुए उन्हें देश में रहने की अनुमति वापस ले ली। इसके चलते, जिन लोगों को कुछ समय पहले ही प्रवेश की मंजूरी मिली थी, उन्हें जल्द ही कनाडा छोड़ने के लिए कहा गया।
इस फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर इस बात को लेकर कि जब पहले सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी गई थीं और परमिट जारी कर दिया गया था, तो फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि अधिकारियों को अपना निर्णय बदलना पड़ा।
कनाडा की संसद में विपक्ष के नेता लियोनिडास हाउसाकोस ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं देश की नीतियों और उनके क्रियान्वयन के बीच स्पष्ट असंगति को दर्शाती हैं।
हाउसाकोस ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि जब कनाडा सरकार ने वर्ष 2024 से इस्लामिक रिवोल्यूशन से जुड़े तत्वों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही थी, तो फिर ऐसे व्यक्तियों को पहले प्रवेश की अनुमति कैसे दी गई। उनके मुताबिक, यह न केवल नीतिगत स्पष्टता की कमी को दिखाता है, बल्कि इससे सुरक्षा और प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार को इस पूरे घटनाक्रम पर पारदर्शिता के साथ जवाब देना चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन परिस्थितियों में पहले अनुमति दी गई और बाद में उसे वापस लेने का फैसला क्यों किया गया।
हाउसाकोस का मानना है कि इस तरह के मामलों में एक स्पष्ट और सुसंगत नीति बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने और देश की अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी कोई नकारात्मक असर न पड़े।
कनाडा सरकार द्वारा आईआरजीसी (IRGC) को आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने के बाद उसके पास उससे जुड़े व्यक्तियों और नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के व्यापक अधिकार आ जाते हैं। इस फैसले के तहत सरकार ऐसे लोगों की संपत्तियों को जब्त कर सकती है, उनके वित्तीय लेन-देन पर निगरानी रख सकती है और देश के भीतर उनकी किसी भी गतिविधि पर रोक लगा सकती है।
इसके साथ ही, कनाडा को यह अधिकार भी मिल जाता है कि वह आईआरजीसी से जुड़े या उससे संबंध रखने वाले व्यक्तियों के देश में प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा सके। ऐसे मामलों में वीज़ा जारी करने से इनकार किया जा सकता है या पहले से दी गई अनुमति को भी रद्द किया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की घोषणा सिर्फ एक औपचारिक कदम नहीं होती, बल्कि इसके जरिए सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर सख्त उपाय लागू कर सकती है। इससे न केवल संदिग्ध गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सकता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक स्पष्ट संदेश जाता है कि देश आतंकवाद से जुड़े किसी भी प्रकार के संबंध को बर्दाश्त नहीं करेगा।
आयोजन स्थल के बाहर कनाडा में बसे ईरानी समुदाय के लोगों ने इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन की तैयारी भी की थी। बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में लोग वहां इकट्ठा होकर अपनी नाराज़गी जाहिर करने वाले थे, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील बन गया था।
इस बीच, मेहदी ताज की पृष्ठभूमि को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। कहा जाता है कि उन्होंने 1979 की ईरानी क्रांति के बाद इस्फहान में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई थी, और उसी दौर से उनका नाम विभिन्न संस्थाओं और गतिविधियों से जुड़ता रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि इसी तरह के ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भों की वजह से उनके कनाडा दौरे को लेकर विवाद खड़ा हुआ। एक ओर जहां कुछ लोग इसे महज एक खेल से जुड़ा दौरा मान रहे थे, वहीं दूसरी तरफ कई लोग इसे व्यापक राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देख रहे हैं।
कुल मिलाकर, यह पूरा घटनाक्रम खेल, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जटिल मेल को दर्शाता है, जिसमें एक व्यक्ति की यात्रा भी बड़े स्तर पर बहस और विरोध का कारण बन सकती है।