अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के एक महीने बाद भी हालात शांत होते नजर नहीं आ रहे हैं। इस जंग का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है और कई जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे हुए हैं।
हालांकि, भारत के लिए एक राहत की खबर सामने आई है। भारतीय झंडे वाला एलपीजी से भरा जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर चुका है। यह जहाज 28 फरवरी को, जंग शुरू होने से एक दिन पहले, UAE के रुवैस पोर्ट से रवाना हुआ था और एक हफ्ते में भारत पहुंचने की उम्मीद थी।
लेकिन सीमित अनुमति के कारण ज्यादातर जहाजों को वहां से गुजरने में दिक्कत हो रही है। इसी वजह से इस एलपीजी टैंकर को होर्मुज पार करने में करीब तीन हफ्ते का समय लग गया।
तीन हफ्ते बाद जहाज ने होर्मुज पार किया
जो जहाज एक हफ्ते में भारत पहुंचना था, उसे पहुंचने में करीब तीन हफ्ते लग गए। खबरों के मुताबिक, गैस चीफ ऑफिसर सोहन लाल ने उस दौरान के हालात को बेहद डरावना बताया। एलपीजी से भरे इस भारतीय जहाज पर मौजूद 27 क्रू मेंबर्स तीन हफ्तों तक लगातार डर के माहौल में रहे।
होर्मुज में फंसे रहने के दौरान वे हर दिन अपने ऊपर से गुजरती मिसाइलें और ड्रोन देखते थे। सोहन लाल के अनुसार, क्रू को 11 मार्च के आसपास रवाना होने के लिए तैयार रहने को कहा गया था, लेकिन हालात इतने खराब थे कि जहाज को 23 मार्च तक निकलने की अनुमति नहीं मिली।
आखिरकार, ईरानी सेना ने टैंकर को ईरान के तट से दूर लारक द्वीप के उत्तर में एक संकरे रास्ते से गुजरने की इजाजत दी, जिसके बाद जहाज सुरक्षित आगे बढ़ सका।
चालाकी से पार किया होर्मुज
सोहन लाल के अनुसार, भारतीय अधिकारियों ने जहाज को सीधे होर्मुज से ले जाने के बजाय लारक के रास्ते से निकालने का सुझाव दिया, क्योंकि मुख्य रास्ता बारूदी सुरंगों से खतरे भरा था।
जब सभी क्रू मेंबर्स तैयार हो गए, तब अधिकारियों और जहाज के मालिक ने आगे बढ़ने की अनुमति दी। इस दौरान जहाज ने सुरक्षित रास्ता अपनाया।
यात्रा के समय भारतीय नौसेना ने भी अहम भूमिका निभाई। ओमान की खाड़ी से लेकर अरब सागर तक करीब 20 घंटे के सफर में नौसेना ने जहाज को गाइड किया और पूरी सुरक्षा दी।

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