इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते नेपाल में पेट्रोल और डीजल की भारी कमी हो गई है। लोग आसानी से ईंधन नहीं पा रहे हैं। इसे नियंत्रित करने के लिए नेपाल सरकार ने हर हफ्ते 2 दिन की सरकारी छुट्टी लागू करने का फैसला किया है, ताकि पेट्रोल-डीजल की समस्या को कम किया जा सके।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने पेट्रोल और डीजल की कमी को लेकर बैठक बुलाई। इस दौरान उन्होंने फैसला किया कि हफ्ते में 2 दिन की सरकारी छुट्टी लागू की जाएगी, ताकि ईंधन की खपत को कम किया जा सके।
हालांकि यह समस्या सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं है। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की वजह से दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कमी और कीमतों में वृद्धि हो रही है। खासकर, ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करना इस संकट की बड़ी वजह है, क्योंकि इस मार्ग से दुनिया के लगभग 20-25% गैस और पेट्रोलियम उत्पाद सप्लाई होते हैं।
नेपाल में पेट्रोल और डीजल की कमी ने लोगों की रोजमर्रा की ज़िंदगी को काफी प्रभावित किया है। इस समस्या की मुख्य वजह इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को माना जा रहा है। युद्ध और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे नेपाल जैसे आयात-आधारित देश में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता कम हो गई है।
लोग अब आसानी से पेट्रोल-डीजल नहीं खरीद पा रहे हैं, जिससे सड़क परिवहन, व्यवसाय और रोजमर्रा की गतिविधियों में बाधा आ रही है। ईंधन की यह कमी आम जनता और व्यवसाय दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
इस तात्कालिक संकट से निपटने के लिए नेपाल सरकार ने तुरंत कदम उठाए हैं। कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि हफ्ते में दो दिन की सरकारी छुट्टी लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य ईंधन की खपत को कम करना और संकट की गंभीरता को थोड़े हद तक नियंत्रित करना है। सरकार का मानना है कि इस कदम से पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता बेहतर हो सकेगी और नागरिकों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
इस स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में सुधार नहीं होता, तो नेपाल में ईंधन की कमी और भी बढ़ सकती है। ऐसे में सरकार द्वारा उठाया गया कदम फिलहाल स्थिति को संतुलित करने की कोशिश माना जा रहा है।

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