पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है, खासकर अमेरिका पर। जहां अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी होती नजर आ रही है, वहीं भारत के लिए सकारात्मक संकेत सामने आ रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भारत की आर्थिक मजबूती को देखते हुए उसके विकास अनुमान लगातार बढ़ा रही हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत एक मजबूत और उभरती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में सामने आ रहा है।
भारत के लिए सकारात्मक संकेत
दूसरी ओर, भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत की ग्रोथ दर 6.9% रहने का अनुमान जताया है। वहीं, वर्ल्ड बैंक पहले ही 7.6% ग्रोथ का अनुमान दे चुका है। मजबूत घरेलू मांग, बेहतर वित्तीय स्थिति और अमेरिका द्वारा टैरिफ में ढील जैसे कारण भारत की आर्थिक बढ़त को सहारा दे रहे हैं।
घरेलू मांग से मिल रही मजबूती
भारत की अर्थव्यवस्था को सबसे बड़ा सहारा उसकी मजबूत घरेलू खपत से मिल रहा है। देश में उपभोग का स्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है, जिससे उद्योग और सेवा क्षेत्र को मजबूती मिल रही है। साथ ही, सरकार के सुधारात्मक कदम, इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता निवेश और निजी क्षेत्र की भागीदारी भी आर्थिक रफ्तार को तेज कर रहे हैं।
ADB ने जताई चिंता भी
हालांकि एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने भारत की ग्रोथ को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं, लेकिन कुछ जोखिमों की ओर भी इशारा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी तनाव से सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है। इससे महंगाई बढ़ने की आशंका है और एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की रफ्तार पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, वैश्विक वित्तीय हालात सख्त होने से कर्ज महंगा हो सकता है, जो विकास के लिए चुनौती बन सकता है।

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