वॉशिंगटन से सामने आई खबर के अनुसार अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों को लेकर अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं और नौसैनिक नाकेबंदी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी नौसेना ने मध्य पूर्व क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।
बताया जा रहा है कि इस अभियान के तहत कम से कम 15 युद्धपोत तैनात किए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ कई विध्वंसक जहाज भी शामिल हैं। इन जहाजों की तैनाती का मकसद ईरान के समुद्री मार्गों पर दबाव बनाना और उसके बंदरगाहों की गतिविधियों पर नजर रखना है।
इस कदम के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि इसे अमेरिका की ओर से एक सख्त रणनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
अमेरिकी नौसेना ने मध्य पूर्व में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करते हुए कई युद्धपोतों को तैनात किया है। इस बेड़े में USS बैनब्रिज, USS थॉमस हडनर, USS फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर, USS डेलबर्ट डी. ब्लैक, USS जॉन फिन, USS माइकल मर्फी, USS मिट्शर, USS पिंकनी, USS राफेल पेराल्टा, USS स्प्रुएन्स और USS मिलियस जैसे आधुनिक विध्वंसक शामिल हैं। इसके अलावा त्रिपोली एम्फीबियस रेडी ग्रुप भी क्षेत्र में सक्रिय है, जिसमें USS त्रिपोली, USS न्यू ऑरलियन्स और USS रशमोर जैसे जहाज तैनात हैं। कुछ सहायक जहाज भी इस मिशन का हिस्सा हैं, हालांकि वे अभी पूरी तरह से ऑपरेशन क्षेत्र में नहीं पहुंचे हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ये सभी जहाज अलग-अलग क्षेत्रों में फैले हुए हैं, इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि किन जहाजों को सीधे नाकेबंदी अभियान में लगाया जाएगा। कुछ सहायक जहाजों को अभी स्वेज नहर या अफ्रीका के रास्ते होकर इस क्षेत्र तक पहुंचना है।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वह अकेले भी इस तरह के सैन्य दबाव को बनाए रखने में सक्षम है। यह पूरा कदम पाकिस्तान में हुई लंबी बातचीत के असफल रहने के बाद उठाया गया है। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच करीब 21 घंटे तक चर्चा चली, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सभी प्रमुख बंदरगाहों पर नाकेबंदी लागू करने का आदेश दे दिया, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।

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