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भारत पर दबाव बढ़ा, रूस-ईरान से तेल खरीद पर रोक के संकेत

Updated: 16-04-2026, 09.36 AM

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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच United States ने ऊर्जा व्यापार से जुड़े अपने रुख में बड़ा बदलाव किया है। पहले अमेरिका ने कुछ देशों को प्रतिबंधों से राहत देते हुए Iran और Russia से सीमित मात्रा में तेल खरीदने की अनुमति दी थी, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अचानक आपूर्ति संकट न पैदा हो। लेकिन अब यह छूट खत्म करने का फैसला लिया गया है।

अमेरिकी प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस तरह की छूट को आगे जारी नहीं रखा जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि जिन देशों को अब तक विशेष अनुमति के तहत ईरान और रूस से ऊर्जा खरीदने की सुविधा मिल रही थी, वह व्यवस्था अब समाप्त हो रही है।

इस पर जानकारी देते हुए अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent ने बुधवार (15 अप्रैल) को कहा कि वाशिंगटन अब उन सामान्य लाइसेंसों का नवीनीकरण नहीं करेगा, जिनके तहत रूसी और ईरानी तेल की खरीद की अनुमति दी जाती थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था अस्थायी थी और अब इसे आगे बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।

बेसेंट के अनुसार, 11 मार्च से पहले जिन तेल शिपमेंट्स को अनुमति दी गई थी—चाहे वे जहाजों पर लोड हो चुके थे या ट्रांजिट में थे—उन्हें पहले ही पूरा कर लिया गया है या उनका निपटान हो चुका है। इसलिए अब इस पुराने प्रावधान की कोई जरूरत नहीं रह गई है।

United States के वित्त मंत्रालय ने 12 मार्च को एक अस्थायी व्यवस्था के तहत भारतीय रिफाइनरियों को पहले से लोड किए गए रूसी कच्चे तेल की खरीद की अनुमति दी थी। यह छूट सीमित अवधि के लिए लागू की गई थी, जिसकी समय सीमा 30 दिन तय की गई थी, ताकि वैश्विक बाजार में अचानक सप्लाई बाधित न हो और ऊर्जा आपूर्ति संतुलित बनी रहे।

इस अस्थायी राहत का उद्देश्य उन तेल शिपमेंट्स को लेकर स्पष्टता देना था, जो पहले से समुद्र में थे या प्रतिबंध लागू होने से पहले लोड किए जा चुके थे। अमेरिका ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि इन पुराने कार्गो को बाजार में बेचने में किसी तरह की रुकावट न आए, ताकि अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति पर अचानक दबाव न बने।

इस फैसले की घोषणा करते हुए अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent ने कहा था कि यह कदम वैश्विक तेल आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए उठाया गया है। उनके अनुसार, यह व्यवस्था केवल एक अस्थायी समाधान है और इसका मकसद रूस को किसी तरह का अतिरिक्त आर्थिक लाभ देना नहीं है।

बेसेंट ने स्पष्ट किया था कि यह छूट केवल उन जहाजों पर लागू होगी जो प्रतिबंध लागू होने के समय पहले से ही रास्ते में थे या जिनका तेल पहले ही लोड किया जा चुका था। उन्होंने जोर देकर कहा कि इससे Russia को कोई नया या अतिरिक्त फायदा नहीं मिलेगा, बल्कि यह सिर्फ पुराने लेन-देन को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने की प्रक्रिया है।

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