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कनाडा-UK में सख्ती, जर्मनी बना छात्रों की पहली पसंद

Updated: 20-04-2026, 07.08 AM

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अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन में वीजा तथा स्थायी निवास (PR) से जुड़े नियम लगातार सख्त होते जा रहे हैं। ऐसे माहौल में अब अंतरराष्ट्रीय छात्रों का ध्यान तेजी से यूरोप की ओर, खासकर जर्मनी की तरफ शिफ्ट हो रहा है। पढ़ाई के लिए बेहतर अवसर, कम खर्च और सरल प्रक्रियाएं जर्मनी को एक आकर्षक विकल्प बना रही हैं।

आंकड़ों की बात करें तो 2025-26 के शैक्षणिक सत्र में जर्मनी में विदेशी छात्रों की संख्या लगभग 4.20 लाख तक पहुंचने का अनुमान है, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर हो सकता है। इससे पहले 2024-25 में करीब 4.02 लाख अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने वहां दाखिला लिया था, जो उस समय का सबसे बड़ा आंकड़ा था। इस तरह साल-दर-साल लगभग 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो जर्मनी की बढ़ती लोकप्रियता को साफ तौर पर दिखाती है।

इस बढ़ोतरी में एशियाई देशों की बड़ी भूमिका है। भारत और वियतनाम जैसे देशों से छात्रों की संख्या खास तौर पर तेजी से बढ़ रही है। बेहतर शिक्षा प्रणाली, रिसर्च के अवसर और कई मामलों में कम या शून्य ट्यूशन फीस जैसे कारण छात्रों को जर्मनी की ओर आकर्षित कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, वैश्विक शिक्षा के नक्शे पर जर्मनी एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर रहा है, जहां आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या और भी बढ़ने की संभावना है।

जर्मनी अब भारतीय छात्रों के लिए सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, वहां पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या करीब 59 हजार तक पहुंच चुकी है। खास बात यह है कि यह संख्या सिर्फ एक साल में लगभग 20 प्रतिशत बढ़ी है, जो इस ट्रेंड की तेजी को दिखाती है। कुल अंतरराष्ट्रीय छात्रों में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की हिस्सेदारी भी काफी अहम है, जो लगभग 33 प्रतिशत बताई जा रही है।

जर्मनी की लोकप्रियता के पीछे कई मजबूत कारण हैं। वहां के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में पढ़ाई लगभग मुफ्त है, जिससे छात्रों पर आर्थिक बोझ काफी कम हो जाता है। इसके अलावा, पढ़ाई पूरी करने के बाद 18 महीने तक काम करने का अवसर (पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा) मिलता है, जिससे छात्रों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल करने का मौका मिलता है। सरकार की ओर से मिलने वाली छात्रवृत्तियां भी एक बड़ा आकर्षण हैं। अगर खर्च की बात करें, तो छात्रों को केवल 150 से 250 यूरो प्रति सेमेस्टर के हिसाब से प्रशासनिक शुल्क देना होता है, जो अन्य देशों के मुकाबले काफी कम है।

इमिग्रेशन विशेषज्ञ पवन कुमार गुप्ता का मानना है कि जर्मनी निश्चित रूप से छात्रों को बेहतर और अपेक्षाकृत आसान अवसर दे रहा है। हालांकि, अभी भी कनाडा, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश कई छात्रों की प्राथमिक पसंद बने हुए हैं। उनके अनुसार, आने वाले समय में जर्मनी अपने कॉलेजों के माध्यम से वीजा मेले और अन्य प्रचार गतिविधियों के जरिए और अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित करने की दिशा में काम करेगा।

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