इमिग्रेशन

कनाडा सरकार का कड़ा रुख: पेरेंट्स-ग्रैंडपेरेंट्स प्रोग्राम (PGP) पर रोक, जानिए अब कैसे बुला सकेंगे माता-पिता को पास

कनाडा को अपना नया आशियाना बना चुके और वहां पक्के तौर पर बस चुके हजारों प्रवासी परिवारों के लिए एक बेहद निराश करने वाली खबर आई है। कनाडा सरकार के ताजा फैसले ने उन प्रवासियों के सपनों पर पानी फेर दिया है जो बरसों की कड़ी मेहनत के बाद अब अपने माता-पिता या दादा-दादी को हमेशा के लिए अपने पास बुलाने की उम्मीद लगाए बैठे थे। सरकार द्वारा पैरेंट्स एंड ग्रैंडपैरेंट्स प्रोग्राम (Parents and Grandparents Program – PGP) को अचानक निलंबित किए जाने से अब प्रवासी अपने बुजुर्गों को कनाडा की स्थायी नागरिकता (PR) दिलाने के लिए प्रायोजित (Sponsor) नहीं कर सकेंगे।

इस नीतिगत बदलाव ने कनाडाई प्रवासी समुदाय के भीतर चिंता, निराशा और एक अजीब सी बेबसी का माहौल पैदा कर दिया है।

बिखर गए परिवारों को एक करने के सपने

कनाडा में रहने वाले प्रवासियों के लिए पीजीपी (PGP) महज एक इमिग्रेशन स्कीम नहीं थी, बल्कि यह बिखर चुके परिवारों को दोबारा एक करने (Family Reunification) का सबसे बड़ा जरिया थी। भारतीय मूल के लोगों सहित दुनिया भर से आए लाखों कुशल पेशेवर इस उम्मीद में दिन-रात काम करते हैं कि एक दिन वे अपने माता-पिता को भी कनाडा की पीआर दिलाकर उनके बुढ़ापे का सहारा बनेंगे और उन्हें अपने साथ सुरक्षित जीवन दे सकेंगे।

अब नए नियमों के लागू होने के बाद, जो लोग इस साल अपने माता-पिता के लिए स्पॉन्सरशिप फाइल करने की तैयारी में जुटे थे, उनके पास फिलहाल कोई रास्ता नहीं बचा है। इस फैसले के कारण कई परिवारों को अब अपने माता-पिता की सुरक्षा, अकेलेपन और उनकी देखभाल को लेकर लंबी अनिश्चितता का सामना करना पड़ेगा।

कड़े फैसलों के पीछे इमिग्रेशन सिस्टम पर बढ़ता दबाव

कनाडाई सरकार और इमिग्रेशन विभाग (IRCC) पिछले काफी समय से देश के भीतर आवास संकट (Housing Crisis), स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते दबाव और बुनियादी ढांचे की कमी को लेकर स्थानीय नागरिकों के निशाने पर हैं। कनाडाई नागरिकों का एक बड़ा वर्ग लगातार इमिग्रेशन नीतियों को सख्त करने की मांग कर रहा था।

विशेषज्ञों का मानना है कि बुजुर्ग माता-पिता और दादा-दादी को पीआर देने से देश की मुफ्त स्वास्थ्य प्रणाली (Healthcare System) पर वित्तीय बोझ काफी बढ़ जाता है, क्योंकि उम्रदराज लोगों को अधिक चिकित्सा देखभाल की जरूरत होती है। इसी दबाव और भारी-भरकम बैकलॉग को मैनेज करने के लिए सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया है। हालांकि, इस फैसले से उन लोगों में भारी नाराजगी है जो टैक्सपेयर के रूप में कनाडा की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दे रहे हैं और उम्मीद कर रहे थे कि सरकार उनके परिवारों के प्रति थोड़ी संवेदनशीलता दिखाएगी।

नए आवेदनों पर रोक क्यों? इमिग्रेशन विभाग ने किया साफ

अक्सर इमिग्रेशन नीतियों को लेकर उठते सवालों के बीच, कनाडाई इमिग्रेशन विभाग (IRCC) ने इस रोक के पीछे की वजहों को बेहद स्पष्ट रूप से सामने रखा है। विभाग का कहना है कि वे फिलहाल नए आवेदनों का बोझ और ज्यादा नहीं बढ़ाना चाहते।

बैकलॉग को खत्म करने पर पूरा फोकस: विभाग ने साफ किया है कि उनके पास पहले से ही हजारों पुराने आवेदन लंबित (Pending) पड़े हैं। सरकार की पहली प्राथमिकता इन पुराने और कतार में खड़े आवेदनों की फाइलिंग को प्रोसेस करना और उनका निपटारा करना है।

सिस्टम को री-स्ट्रक्चर करने की तैयारी: इस रोक के दौरान इमिग्रेशन विभाग पूरे सिस्टम की समीक्षा करेगा ताकि भविष्य में इस प्रोग्राम को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और कुशल बनाया जा सके। कनाडाई प्रशासन का मानना है कि बिना बैकलॉग को संभाले नए आवेदन लेना सिस्टम को और अधिक लाचार बना देगा।

प्रवासियों के सामने खड़ी हुई बड़ी अनिश्चितता

15 जुलाई 2026 का यह आधिकारिक बयान उन लोगों के लिए बहुत बड़ा झटका है जो इस साल अपनी फाइल्स तैयार कर चुके थे और पोर्टल खुलने का इंतजार कर रहे थे। कनाडा की इमिग्रेशन व्यवस्था में लगातार हो रहे इन कड़े बदलावों ने यह साफ कर दिया है कि अब वहां अपने परिवार को पक्के तौर पर बसाना पहले जितना आसान नहीं रह गया है।

snrhd

Sneha Sharma is a Senior Hindi Correspondent for StudioX News Canada, leading the Hindi editorial desk at hi.studioxnews.ca. She brings over three years of journalism experience across print, digital, and broadcast media in India. Her career includes roles at Jagran New Media (Her Zindagi), Zee News Hindi, TV100, Rashtriya Sahara, Amar Ujala, and Search India News, where she worked as a content writer, ground reporter, and news anchor. She holds a BA in Journalism and Mass Communication from Dev Sanskriti University, Haridwar. At StudioX News, she covers Canada immigration, community affairs, South Asia news, and diaspora stories for Hindi-speaking communities across Canada.

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