कनाडा

कनाडा में अल्जाइमर मरीजों को मिल सकती है बड़ी राहत, सरकारी दवा योजनाओं में शामिल होगी ‘लेकेनेमैब’

कनाडा में शुरुआती चरण के अल्जाइमर रोग से जूझ रहे मरीजों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। कनाडा की ड्रग एजेंसी (Canada’s Drug Agency) ने सिफारिश की है कि देश के सरकारी ड्रग प्लान्स (Public Drug Plans) के तहत अल्जाइमर के इलाज में काम आने वाली दवा ‘लेकेनेमैब’ (Lecanemab) के खर्च का भुगतान किया जाना चाहिए। हालांकि, इसके लिए मरीजों को कुछ जरूरी और कड़े नियमों व शर्तों को पूरा करना होगा।

क्या है ‘लेकेनेमैब’ और यह कैसे काम करती है?
लेकेनेमैब एक खास तरह की एंटीबॉडी दवा है, जो दिमाग में ‘एमिलॉयड प्लाक’ (Amyloid Plaque) के जमाव को निशाना बनाती है। वैज्ञानिकों और डॉक्टरों का मानना है कि दिमाग में इस प्लाक का इकट्ठा होना ही अल्जाइमर बीमारी की मुख्य वजहों में से एक है। यह दवा बीमारी के शुरुआती दौर में इसके बढ़ने की रफ्तार को काफी धीमा कर देती है, जिससे मरीजों को बड़ी राहत मिलती है।

फैसले को क्यों पलटना पड़ा?

इस दवा के सफर में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं:

अक्टूबर 2025 में मिली थी मंजूरी: ‘हेल्थ कनाडा’ (Health Canada) ने पिछले साल अक्टूबर (अक्टूबर 2025) में ही इस दवा के इस्तेमाल को अपनी मंजूरी दे दी थी।

फरवरी 2026 में फंडिंग से किया था इनकार: इसके बाद फरवरी 2026 में कनाडा की ड्रग एजेंसी ने इस दवा को सरकारी फंडिंग देने से साफ मना कर दिया था। उस समय एजेंसी ने इसके असरदार होने पर संदेह जताया था और दिमाग में सूजन व ब्लीडिंग (खून बहने) जैसे गंभीर साइड इफेक्ट्स को लेकर चिंता जाहिर की थी।

कंपनी की अपील पर दोबारा विचार: इस फैसले के बाद दवा बनाने वाली कंपनी ‘ईसाई’ (Eisai) ने एजेंसी से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की थी।

एजेंसी ने माना- कम आंका गया था दवा का असर

दवा निर्माता कंपनी के अनुरोध पर दोबारा की गई समीक्षा के बाद, एजेंसी की विशेषज्ञ समिति ने स्वीकार किया है कि उन्होंने शायद पहले लेकेनेमैब के “क्लिनिकल महत्व” (Clinical Meaningfulness) को कम आंका था। गहन पुनर्मूल्यांकन के बाद अब समिति इस नतीजे पर पहुंची है कि कड़े नियंत्रण और सही नियमों के तहत यह दवा अल्जाइमर के मरीजों के जीवन को बेहतर बनाने में बेहद मददगार साबित हो सकती है। इसी वजह से अब इसे सरकारी बीमा और ड्रग प्लांस में शामिल करने की हरी झंडी दे दी गई है।

इन मरीजों को ही मिल सकेगा मुफ्त इलाज

एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि ‘लेकेनेमैब’ (Lecanemab) दवा के खर्च का भुगतान सरकारी ड्रग प्लान के तहत केवल तभी किया जाएगा, जब मरीज निम्नलिखित शर्तों को पूरा करेंगे:

शुरुआती लक्षण होना जरूरी: मरीज में केवल माइल्ड कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट (यानी याददाश्त और सोचने की क्षमता में बहुत मामूली गिरावट) के लक्षण होने चाहिए।

दिमाग में प्रोटीन की पुष्टि: ब्रेन स्कैन या रीढ़ की हड्डी के पानी की जांच (Cerebrospinal Fluid Analysis) के जरिए मरीज के दिमाग में ‘एमिलॉयड प्रोटीन’ की मौजूदगी की पुष्टि होना अनिवार्य है।

नियमित एमआरआई स्कैन: इलाज के दौरान मरीज के दिमाग में किसी भी तरह की सूजन या ब्लीडिंग (खून बहने) के खतरों की निगरानी के लिए समय-समय पर एमआरआई (MRI) स्कैन करवाना जरूरी होगा।

“फायदे और नुकसान को समझकर फैसला लें मरीज”

ड्रग एजेंसी की विशेषज्ञ समिति ने अपनी सिफारिशों में मरीजों की स्वतंत्रता और अधिकारों पर भी जोर दिया है। समिति ने कहा, “हमने इस बात पर विशेष रूप से चर्चा की है कि मरीज अपनी मेडिकल टीम के साथ सलाह-मशविरा करके, दवा के संभावित फायदों और इसके साथ जुड़े जोखिमों (साइड इफेक्ट्स) को अच्छी तरह समझें, और उसके बाद ही पूरी समझदारी से इस इलाज को लेने का फैसला करें।”

स्थिति बिगड़ने पर बंद हो जाएगी सरकारी फंडिंग

सिफारिशों में यह भी साफ कर दिया गया है कि अगर इलाज के दौरान किसी मरीज की स्थिति माइल्ड (सामान्य) से मॉडरेट (गंभीर) डिमेंशिया में बदल जाती है, तो उसे इस योजना का लाभ मिलना बंद हो जाएगा और दवा पर होने वाले खर्च को सरकारी प्लान के दायरे से बाहर कर दिया जाएगा। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि अब तक हुए तमाम वैज्ञानिक अध्ययनों में यह साबित हो चुका है कि ‘लेकेनेमैब’ दवा केवल शुरुआती चरण के अल्जाइमर रोग में ही प्रभावी है, गंभीर स्थिति में नहीं।

snrhd

Sneha Sharma is a Senior Hindi Correspondent for StudioX News Canada, leading the Hindi editorial desk at hi.studioxnews.ca. She brings over three years of journalism experience across print, digital, and broadcast media in India. Her career includes roles at Jagran New Media (Her Zindagi), Zee News Hindi, TV100, Rashtriya Sahara, Amar Ujala, and Search India News, where she worked as a content writer, ground reporter, and news anchor. She holds a BA in Journalism and Mass Communication from Dev Sanskriti University, Haridwar. At StudioX News, she covers Canada immigration, community affairs, South Asia news, and diaspora stories for Hindi-speaking communities across Canada.

Follow StudioX Hindi News:

Related Stories