बिहार में दो निर्दलीय विधान परिषद (MLC) सदस्यों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने और फिर अपने बयान से पलट जाने पर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। यह जानकारी दैनिक भास्कर की रिपोर्ट पर आधारित है।

दैनिक भास्कर के अनुसार, निर्दलीय चुनाव जीते बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज 31 अक्टूबर को पटना स्थित भाजपा कार्यालय पहुंचे और पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, बिहार भाजपा प्रभारी हरीश द्विवेदी और बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सारवगी मौजूद बताए गए। सामने आई तस्वीर में दोनों सदस्यता की पर्ची दिखाते नजर आए।
बयान बदला, विपक्ष ने उठाए सवाल
विवाद बढ़ने पर उसी रात ब्रजवासी ने कहा कि उन्होंने भाजपा की सदस्यता नहीं ली है, बल्कि NDA को समर्थन देने का ऐलान किया है। इससे पहले उन्होंने पत्रकारों से कहा था कि शिक्षकों के हित में यह फैसला लिया गया। राहुल राज ने अब तक कोई बयान नहीं दिया है।
विपक्ष ने इसे संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल कानून का उल्लंघन बताया है। RJD सांसद मनोज झा ने विधान परिषद के सभापति से दोनों सदस्यों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है। जन सुराज ने कहा है कि सभापति ने उचित कार्रवाई नहीं की तो मामला हाईकोर्ट में चुनौती दिया जाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार, कानून के जानकारों का मानना है कि निर्दलीय सदस्य चुनाव के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल हों तो सदन की सदस्यता जाने की स्थिति बनती है। उनके अनुसार, यदि सभापति निष्पक्षता से मामला देखें तो दोनों की सदस्यता जाना तय है, हालांकि राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इसकी संभावना कम बताई गई है।
भाजपा के मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सदस्यता जाने का सवाल ही नहीं है। वहीं, मंत्री लखेंद्र पासवान ने मनोज झा की आलोचना करते हुए कहा कि नियमों का हवाला देने का उन्हें अधिकार है।
विधायक राजू सिंह की सदस्यता पर सवाल
भाजपा के साहेबगंज विधायक राजू सिंह की सदस्यता पर भी विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने 6 जून 2026 को उन्हें 31 दिसंबर 2018 की नए साल की पार्टी में हुई हर्ष फायरिंग से जुड़े मामले में दोषी ठहराया, जिसमें एक पूर्व आर्किटेक्ट अर्चना गुप्ता की गोली लगने से मौत हो गई थी। इस मामले में 4 जुलाई 2026 को अदालत ने चार साल की साधारण कैद और 25 लाख रुपये के जुर्माने या मुआवजे का आदेश दिया था।
राजू सिंह की अपील पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 27 जुलाई को सजा पर रोक लगाकर उन्हें जमानत दी। 29 सितंबर को हाईकोर्ट ने उनकी वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें दोषसिद्धि पर रोक मांगी गई थी। अदालत ने कहा कि सजा निलंबित होने के बावजूद जब तक दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगती, तब तक अयोग्यता की प्रक्रिया लागू रहती है।
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार, दो साल या उससे अधिक की सजा होने पर सदस्यता तुरंत रद्द हो सकती है। हाईकोर्ट के फैसले को 33 दिन बीत चुके हैं, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया है, और राजू सिंह अब भी विधायक हैं।
दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर याचिका
RLM प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश 7 मई 2026 को सम्राट कैबिनेट में दोबारा मंत्री बने। इससे पहले वह नीतीश सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं। दोनों बार वह किसी सदन के सदस्य नहीं थे।
इसे लेकर पटना के एक व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इसे संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत अवैध बताया है। 29 जुलाई को सुनवाई करते हुए CJI सूर्यकांत की पीठ ने बिहार सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि बिना चुनाव जीते कोई मंत्री छह महीने से अधिक समय तक पद पर कैसे रह सकता है। इसके बाद 31 जुलाई को भाजपा के विधान परिषद सदस्य देवेश कुमार ने इस्तीफा दिया, और 5 अगस्त को राज्यपाल ने दीपक प्रकाश को उसी खाली सीट पर विधान परिषद सदस्य मनोनीत किया।
सिंह की याचिका और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अभी जारी है।
Source: Dainik Bhaskar
Harnaik Singh Rathor is the Founder, Publisher, and Editor-in-Chief of StudioX News Canada, Canada's multilingual digital news network serving multilingual diaspora communities across Canada. With a background in media production, public relations, and multicultural communications, he founded StudioX Film and TV Corporation to bridge the gap between mainstream Canadian media and the country's diverse immigrant communities. He is a member of the Canadian Association of Journalists (CAJ), RTDNA Canada, CPRS Vancouver, NEPMCC, and the Canadian Freelance Union (Unifor). Based in Surrey, British Columbia. | LinkedIn: https://www.linkedin.com/in/harnaiksinghrathor/ | Muck Rack: https://muckrack.com/harnaiksinghrathor | Email: editor@studioxnews.ca

