ब्रिटेन के नामी और महंगे पब्लिक स्कूल अब भारत में अपने कैंपस खोल रहे हैं। BBC News Hindi की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल की शुरुआत में पंजाब में चंडीगढ़ के पास लड़कियों के लिए एक नया इंटरनेशनल स्कूल खुला। यह ब्रिटेन के 473 साल पुराने एक नामी स्कूल का कैंपस है और लड़कियों के लिए उसका पहला इंटरनेशनल कैंपस है।

इंग्लैंड के बेडफ़र्डशर में स्थित मुख्य इमारत गोथिक शैली में बनी है। भारत में बने कैंपस की इमारतें आधुनिक हैं और पढ़ाई की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। फिर भी यहां लाल ईंटों का ऊंचा क्लॉक टावर ब्रिटिश विरासत की पहचान के रूप में साफ़ दिखता है।
भारत आते ब्रिटिश स्कूल
रिपोर्ट के मुताबिक़, कम से कम छह ब्रिटिश पब्लिक स्कूलों ने भारत के अलग-अलग हिस्सों में कैंपस खोले हैं। ब्रिटेन में “पब्लिक स्कूल” का मतलब लंबे इतिहास वाले ऐसे नामी निजी स्कूलों से है, जहां फ़ीस लेकर पढ़ाई होती है।
- बेंगलुरु में हैरो स्कूल ने 2023 में कैंपस खोला। ब्रिटेन के इसी स्कूल में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने पढ़ाई की थी।
- क्वीन एलिज़ाबेथ्स स्कूल ने इस साल अगस्त में दिल्ली के पास गुरुग्राम में कैंपस खोला।
- श्रूज़बरी स्कूल ने भोपाल में और वेलिंगटन कॉलेज ने पुणे में अपने कैंपस बनाए हैं।
- ख़बरों के मुताबिक़, मिलफ़ील्ड और कुछ दूसरे ब्रिटिश स्कूल आने वाले सालों में भारत में कैंपस खोलने की तैयारी कर रहे हैं।
चीन में मुश्किल, इसलिए भारत पर नज़र
भारत में इन स्कूलों का विस्तार ऐसे समय हो रहा है, जब चीन में बाज़ार के हालात पहले से मुश्किल हो गए हैं। पिछले एक दशक में ब्रिटिश पब्लिक स्कूलों के विदेशी विस्तार का बड़ा हिस्सा चीन और हांगकांग में हुआ था। ब्रिटेन के 50 स्कूल विदेश में कुल 151 कैंपस चलाते हैं, जिनमें से आधे चीन और हांगकांग में हैं।
चीन में 2024 में लागू एक नए क़ानून के तहत हर विषय में देशभक्ति की शिक्षा शामिल करना ज़रूरी कर दिया गया। ब्रिटेन के थिंक टैंक प्राइवेट एजुकेशन पॉलिसी फ़ोरम के 2025 के अध्ययन के अनुसार, इससे विस्तार और मुश्किल हुआ, और कुछ नए कैंपस की योजनाएं भी रद्द करनी पड़ीं। इसके बाद इन स्कूलों ने भारत और वियतनाम जैसे देशों के बारे में सोचना शुरू किया।
ब्रिटेन में एक जनवरी 2025 से निजी स्कूलों की फ़ीस पर 20 फ़ीसदी वैट लागू है, जिसका फ़ैसला 2024 के ऑटम बजट में लिया गया था। बेडफ़र्ड स्कूल मोहाली की संस्थापक प्रिंसिपल नाओमी एटकिंस के अनुसार, इससे कई निजी स्कूलों को विदेशों में नए मौक़े तलाशने पड़े हैं।
भारत में चुनौतियां और अपील
भारत में क़रीब 25 करोड़ बच्चे स्कूलों में पढ़ते हैं, इसलिए यहां शिक्षा का बाज़ार बहुत बड़ा दिखता है। लेकिन अंग्रेज़ी माध्यम की शिक्षा पहले से मज़बूत है और बड़ी संख्या में स्थानीय स्कूल भी मौजूद हैं। इसलिए ब्रिटिश स्कूलों को कड़े मुक़ाबले का सामना करना पड़ता है।
पूरी तरह बोर्डिंग सुविधा वाले ये स्कूल 15 हज़ार पाउंड या उससे भी ज़्यादा फ़ीस ले सकते हैं, जबकि भारत में प्रति व्यक्ति आमदनी काफ़ी कम है। इसी को ध्यान में रखते हुए बेडफ़र्ड मोहाली ने अपनी फ़ीस दूसरे ब्रिटिश स्कूलों की तुलना में लगभग आधी रखी है। एटकिंस के मुताबिक़, भारतीय परिवार क़ीमतों को लेकर ज़्यादा सावधान रहते हैं।
रिपोर्ट में भारत में स्कूलों की एक शृंखला चलाने वाले एक परिवार की राय भी शामिल है। इस परिवार ने अपनी पांच साल की बेटी को बेडफ़र्ड मोहाली भेजने का फ़ैसला किया। उनके अनुसार यहां पढ़ाई के साथ बच्चों के चरित्र, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व पर भी ज़ोर दिया जाता है, और कई भारतीय स्कूलों के उलट यहां “वीआईपी संस्कृति” नहीं है।
हैरो स्कूल बेंगलुरु की प्रमुख कैरोलिन पास्को के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम कई परिवारों को आकर्षित करता है। भारत में हैरो और बेडफ़र्ड उन गिने-चुने स्कूलों में हैं, जहां प्राइमरी से ए-लेवल तक पूरा कैंब्रिज पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है। हैरो बेंगलुरु में 60 फ़ीसदी कर्मचारी विदेश से आए हैं। यहां शिक्षकों को “बीक्स” कहा जाता है, छात्र पारंपरिक टोपी और यूनिफ़ॉर्म पहनते हैं, हर सुबह राष्ट्रगान गाया जाता है और गणेश चतुर्थी भी मनाई जाती है।
पास्को का कहना है कि भारत के अमीर परिवारों के अलावा विदेश में रहने वाले भारतीय भी इन स्कूलों के लिए बड़ा बाज़ार हैं। इनमें लंबे समय तक विदेश रहने के बाद भारत लौटे परिवार और ब्रिटेन या मध्य पूर्व में रहने वाले वे भारतीय शामिल हैं, जो चाहते हैं कि उनके बच्चे अपनी जड़ों से जुड़े रहें।
Source: BBC News Hindi
Harnaik Singh Rathor is the Founder, Publisher, and Editor-in-Chief of StudioX News Canada, Canada's multilingual digital news network serving multilingual diaspora communities across Canada. With a background in media production, public relations, and multicultural communications, he founded StudioX Film and TV Corporation to bridge the gap between mainstream Canadian media and the country's diverse immigrant communities. He is a member of the Canadian Association of Journalists (CAJ), RTDNA Canada, CPRS Vancouver, NEPMCC, and the Canadian Freelance Union (Unifor). Based in Surrey, British Columbia. | LinkedIn: https://www.linkedin.com/in/harnaiksinghrathor/ | Muck Rack: https://muckrack.com/harnaiksinghrathor | Email: editor@studioxnews.ca

