कनाडा में भारतीय छात्र कार्तिक वासुदेव की हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। इस मामले में दोषी ठहराए गए रिचर्ड एडविन को आजीवन कारावास की सजा दी गई है। कार्तिक, जो उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद का रहने वाला था, टोरंटो स्थित सेनेका कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अदालत ने एडविन को दो अलग-अलग लोगों की हत्या का दोषी पाया। इन हत्याओं में एक पीड़ित कार्तिक वासुदेव था, जिसकी मौत ने भारतीय समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया था।
टोरंटो की सुपीरियर कोर्ट ने इस अपराध को फर्स्ट-डिग्री मर्डर की श्रेणी में रखा और आरोपी को बिना पैरोल की संभावना के आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसका मतलब है कि उसे लंबे समय तक जेल में रहना होगा और जल्द रिहाई की कोई गुंजाइश नहीं है।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने 7 अप्रैल 2022 और 9 अप्रैल 2022 को दो अलग-अलग घटनाओं में इन हत्याओं को अंजाम दिया था। इन घटनाओं ने उस समय स्थानीय लोगों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच भी चिंता का माहौल पैदा कर दिया था।
इस फैसले के साथ ही करीब चार साल बाद पीड़ित परिवार को कुछ हद तक न्याय मिला है, हालांकि उनके लिए इस नुकसान की भरपाई कभी संभव नहीं हो सकती।
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने आरोपी की मानसिक स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि रिचर्ड एडविन ने कार्तिक वासुदेव को गोली मारने की बात तो स्वीकार की है, लेकिन इस आधार पर उसे पूरी तरह आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।
वकीलों का कहना था कि घटना के समय आरोपी गंभीर मानसिक विकार से जूझ रहा था। उनकी दलील के अनुसार, उसकी मानसिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह अपने कृत्य के परिणाम या सही और गलत के बीच अंतर को ठीक से समझ सके। इसी वजह से बचाव पक्ष ने अदालत से अपील की कि आरोपी को सामान्य अपराधी की तरह न देखा जाए, बल्कि उसकी मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए फैसला किया जाए।
उन्होंने यह भी जोर दिया कि मानसिक बीमारी के कारण व्यक्ति के फैसले लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, और ऐसे मामलों में कानून अलग दृष्टिकोण अपनाने की गुंजाइश देता है। हालांकि, अदालत ने सभी तथ्यों और सबूतों को ध्यान में रखते हुए अपना अंतिम निर्णय सुनाया।
अदालत ने अपने फैसले में यह स्वीकार किया कि घटना के समय रिचर्ड एडविन सिजोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारी से पीड़ित था। हालांकि, इसके बावजूद अदालत ने उसे आपराधिक जिम्मेदारी से मुक्त करने की दलील को खारिज कर दिया और माना कि वह अपने कृत्य के लिए जिम्मेदार है।
मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया कि कार्तिक वासुदेव उस दिन शेरबोर्न स्टेशन से निकलकर ब्लूर स्ट्रीट ईस्ट की ओर जाने वाली सीढ़ियों की तरफ बढ़ रहा था। इसी दौरान आरोपी तेजी से उसके पास से गुजरा, फिर अचानक पीछे मुड़ा और उसकी पीठ पर कई गोलियां चला दीं। यह हमला अचानक और बेहद निर्मम था, जिसने पूरे मामले को झकझोर कर रख दिया।
कार्तिक के पिता जितेश वासुदेव ने बताया कि वह और उनकी पत्नी अंतिम सुनवाई में शामिल होने के लिए कनाडा में ही ठहरे हुए थे। उन्होंने कहा कि करीब चार साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार उन्हें न्याय मिला है।
कार्तिक जनवरी 2022 में मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए टोरंटो गया था। परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं, लेकिन कुछ ही महीनों के भीतर उसकी हत्या की खबर ने उनकी दुनिया बदल दी। अब अदालत के इस फैसले से उन्हें थोड़ी राहत जरूर मिली है, हालांकि बेटे के जाने का दर्द हमेशा बना रहेगा।