कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी सोमवार को तुर्किये की राजधानी अंकारा में आयोजित दो दिवसीय NATO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रवाना हो रहे हैं। इस बैठक में विश्व नेताओं की कोशिश रहेगी कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ किसी भी तरह के कूटनीतिक टकराव से बचा जा सके।
सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों के रक्षा बजट में बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी प्रमुख मुद्दा रहने की संभावना है। अमेरिका लगातार NATO सहयोगियों पर रक्षा खर्च बढ़ाने का दबाव बना रहा है। हालांकि, रूस से पैदा होने वाले खतरे के आकलन और ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति को लेकर सदस्य देशों के बीच मतभेद अब भी बरकरार हैं।
कनाडा के रक्षा थिंक-टैंक CDA Institute की प्रमुख गैएल रिवार्ड पिशे ने कहा कि इस बार का शिखर सम्मेलन केवल रक्षा खर्च बढ़ाने की घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगा। उनके अनुसार, सदस्य देशों को यह भी दिखाना होगा कि वे आवंटित धन का उपयोग आधुनिक सैन्य क्षमताएं विकसित करने और अपनी रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में कर रहे हैं।
मार्क कार्नी सरकार NATO शिखर सम्मेलन में रक्षा खर्च बढ़ाने और रक्षा क्षेत्र में निवेश को अपनी प्रमुख उपलब्धियों के रूप में पेश करने की तैयारी में है। सरकारी अधिकारियों ने शुक्रवार को एक बैकग्राउंड ब्रीफिंग में बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 तक कनाडा का रक्षा खर्च उसकी जीडीपी का 2.13% तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि वर्ष 2035 तक इसे बढ़ाकर 5% करने का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि, सरकार ने अभी तक यह सार्वजनिक नहीं किया है कि 2035 तक इस लक्ष्य को कैसे हासिल किया जाएगा और न ही इसे आधिकारिक वित्तीय ढांचे में शामिल किया गया है।
ओटावा विश्वविद्यालय की वरिष्ठ फेलो और NATO में कनाडा की पूर्व राजदूत केरी बक का कहना है कि इस बार कनाडा वित्तीय तैयारियों के मामले में पहले की तुलना में कहीं बेहतर स्थिति में शिखर सम्मेलन में पहुंच रहा है। उनके मुताबिक, अतीत में ऐसा कम ही देखने को मिला था।
हालांकि, 2025 के NATO सम्मेलन के बाद से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कई फैसलों ने गठबंधन के भीतर असहजता और मतभेद बढ़ा दिए हैं। ट्रंप ने एक ओर NATO से अलग होने की संभावना जताई, तो दूसरी ओर ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने जैसी टिप्पणियां भी कीं। इसके अलावा, उन्होंने ईरान के खिलाफ अचानक सैन्य कार्रवाई शुरू की और बाद में NATO सहयोगियों पर पर्याप्त समर्थन नहीं देने का आरोप लगाया। इसी बीच अमेरिका ने यूरोप में अपनी सैन्य मौजूदगी और संसाधनों में भी कटौती शुरू कर दी है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए इस बार के NATO शिखर सम्मेलन का एजेंडा सीमित रखा गया है, ताकि अमेरिका की विदेश और रक्षा नीति को लेकर किसी सार्वजनिक टकराव की स्थिति पैदा न हो।
केरी बक का मानना है कि मौजूदा समय में NATO के सामने सबसे बड़ी चुनौती गठबंधन की एकजुटता बनाए रखना है। उन्होंने कहा, “फिलहाल NATO को कई ऐसे मतभेदों पर पर्दा डालना पड़ रहा है, जिन पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। लेकिन इस समय किसी भी तरह का राजनीतिक ड्रामा गठबंधन के लिए बहुत महंगा साबित हो सकता है, इसलिए सभी देश न्यूनतम साझा सहमति के आधार पर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।”
Sneha Sharma is a Senior Hindi Correspondent for StudioX News Canada, leading the Hindi editorial desk at hi.studioxnews.ca. She brings over three years of journalism experience across print, digital, and broadcast media in India. Her career includes roles at Jagran New Media (Her Zindagi), Zee News Hindi, TV100, Rashtriya Sahara, Amar Ujala, and Search India News, where she worked as a content writer, ground reporter, and news anchor. She holds a BA in Journalism and Mass Communication from Dev Sanskriti University, Haridwar. At StudioX News, she covers Canada immigration, community affairs, South Asia news, and diaspora stories for Hindi-speaking communities across Canada.

