कनाडा में नई ऑयल पाइपलाइन परियोजना को आगे बढ़ाने को लेकर संघीय सरकार और अल्बर्टा व ब्रिटिश कोलंबिया की प्रांतीय सरकारों के बीच पिछले साल और इस वर्ष हुई बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को आंतरिक सर्वेक्षणों का सहारा मिला। Global News को मिले दस्तावेजों के अनुसार, इन सर्वे में बड़ी संख्या में कनाडाई नागरिकों ने प्रशांत तट तक नई ऑयल पाइपलाइन बिछाने की योजना के प्रति सकारात्मक रुख दिखाया था।
नवंबर के मध्य में दो अलग-अलग मौकों पर कनाडा के Privy Council Office (PCO) ने अपने साप्ताहिक जनमत सर्वे में नई ऑयल पाइपलाइन और अन्य ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन परियोजनाओं को लेकर लोगों की राय जानने के लिए कई सवाल शामिल किए। यह साप्ताहिक पोलिंग कार्यक्रम 2015 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य प्रधानमंत्री, कैबिनेट, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के वरिष्ठ अधिकारियों और शीर्ष नौकरशाहों को विभिन्न मुद्दों पर जनता की सोच से अवगत कराना है।
हालांकि इस सर्वेक्षण का संचालन PCO के गैर-राजनीतिक अधिकारी करते हैं, लेकिन इसकी निगरानी प्रधानमंत्री कार्यालय के राजनीतिक स्टाफ द्वारा की जाती है। हर सप्ताह होने वाले सर्वे के सवाल राजनीतिक सलाहकारों और नौकरशाहों की संयुक्त तैयारी के बाद तय किए जाते हैं।
लगातार दो सप्ताह तक किए गए सर्वेक्षणों में, जिनकी अवधि 23 नवंबर और 30 नवंबर को समाप्त हुई, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की निगरानी में हुए जनमत संग्रह में 2,000 कनाडाई नागरिकों से टेलीफोन के माध्यम से एक सीधा सवाल पूछा गया। उनसे जानना चाहा गया कि क्या वे नई ऑयल पाइपलाइन के निर्माण या मौजूदा पाइपलाइनों के विस्तार का समर्थन करते हैं।
हालांकि, इसके बाद सर्वे में शामिल लोगों से एक और विस्तृत सवाल पूछा गया, जिसे कई पोल विशेषज्ञ “लीडिंग क्वेश्चन” या “पुश-पोल” मान सकते हैं। ऐसे सवालों को इस तरह तैयार किया जाता है कि वे उत्तरदाता की राय को किसी खास दिशा में प्रभावित कर सकते हैं। इस मामले में सवाल का स्वर नई ऑयल पाइपलाइन के विरोध में तर्कों को सामने रखने वाला था।
Global News को सूचना के अधिकार (Access to Information) के तहत मिले दस्तावेजों के अनुसार, टेलीफोन सर्वे में प्रतिभागियों से पूछा गया, “विदेशी बाजारों में ऊर्जा निर्यात बढ़ाने का एक तरीका नई पाइपलाइन बनाना है। हालांकि, इससे अर्थव्यवस्था को लाभ होता है, लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि पाइपलाइन निर्माण के लिए प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र में रास्ते बनाने पड़ते हैं, जिससे पर्यावरण और वन्यजीवों के आवास प्रभावित होते हैं। साथ ही, पाइपलाइनों से रिसाव और तेल फैलने का खतरा भी रहता है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, क्या आप नई पाइपलाइन बनाने या मौजूदा पाइपलाइन का विस्तार करने का समर्थन करते हैं?”
Sneha Sharma is a Senior Hindi Correspondent for StudioX News Canada, leading the Hindi editorial desk at hi.studioxnews.ca. She brings over three years of journalism experience across print, digital, and broadcast media in India. Her career includes roles at Jagran New Media (Her Zindagi), Zee News Hindi, TV100, Rashtriya Sahara, Amar Ujala, and Search India News, where she worked as a content writer, ground reporter, and news anchor. She holds a BA in Journalism and Mass Communication from Dev Sanskriti University, Haridwar. At StudioX News, she covers Canada immigration, community affairs, South Asia news, and diaspora stories for Hindi-speaking communities across Canada.

