इसराइल में 27 अक्टूबर को आम चुनाव हुए, और नतीजों में किसी गठबंधन को साफ़ बहुमत नहीं मिला। यह जानकारी BBC News Hindi के विश्लेषण पर आधारित है।

7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद ग़ज़ा, लेबनान और ईरान में हुए युद्ध के बाद इसराइल में यह पहला आम चुनाव था। इसे प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य पर जनमत संग्रह के तौर पर देखा जा रहा था।
अरब पार्टियां बनीं निर्णायक
120 सदस्यों वाली संसद में सरकार बनाने के लिए 61 सीटें चाहिए। नेतन्याहू के गुट को 53 सीटें मिलीं, जबकि गादी आइज़नकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिलीं। दोनों बहुमत से पीछे रहे।
अरब पार्टियों के गठबंधन को 19 सीटें मिलीं, जो लोगों की उम्मीद से बेहतर नतीजा माना गया है। अरब पार्टियां नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार बताई गई हैं, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार आइज़नकोट और नेतन्याहू विरोधी खेमे के बाकी नेता इसके लिए तैयार नहीं होंगे।
मतदान 77 प्रतिशत से ज़्यादा रहा। राअम पार्टी के नेता मंसूर अब्बास ने पहले नफ़्ताली बेनेट की सरकार को बाहर से समर्थन दिया था, जो करीब 13 महीने चली थी। इस बार अरब पार्टियों ने सरकार में हिस्सेदारी के लिए अपनी तैयारी खुलकर जताई है।
नेतन्याहू और विपक्ष के दावे
नेतन्याहू ने जीत का एलान किया है, लेकिन उनके गुट की सीटें पिछली बार की 68 से घटकर 53 रह गई हैं।
विपक्ष का दावा है कि उनके खेमे को 67 सीटें मिली हैं और यह चुनाव नेतन्याहू के ख़िलाफ़ जनमत संग्रह था। यह विपक्ष का दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि रिपोर्ट में नहीं की गई है।
आइज़नकोट ने 18 महीनों के भीतर हमास का शासन खत्म करने का वादा किया है। ग़ज़ा को लेकर उनका रुख़ नेतन्याहू से बहुत अलग नहीं बताया गया है। डेमोक्रेट्स पार्टी के नेता यायर गोलान ने कहा है कि अरब समुदाय को साथ लेकर चलने का समय आ गया है।
भारत के लिए क्या मायने
भारत और इसराइल के बीच करीबी कूटनीतिक, रक्षा और आर्थिक संबंध रहे हैं। रिपोर्ट में यह सवाल उठाया गया है कि क्या भारत को इसराइल के साथ संबंध बनाए रखते हुए फ़लस्तीन के सवाल पर अपनी कूटनीतिक भूमिका नए सिरे से संतुलित करनी पड़ सकती है।
पूर्व राजदूत नवदीप सिंह सूरी के अनुसार, 7 अक्टूबर के बाद इसराइल की नीतियों का अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा पर नकारात्मक असर पड़ा है। उनका कहना है कि नेतन्याहू प्रधानमंत्री बने रहे तो यह स्थिति शायद और खराब हो, जबकि आइज़नकोट या नेतन्याहू के बिना बनने वाले गठबंधन का वैश्विक स्तर पर सकारात्मक असर हो सकता है।
रक्षा विशेषज्ञ डॉक्टर दिव्या मल्होत्रा के अनुसार, चुनाव में घरेलू अर्थव्यवस्था बड़ा मुद्दा रही है, खासकर वहां की युवा पीढ़ी के लिए।
Source: BBC News Hindi
Harnaik Singh Rathor is the Founder, Publisher, and Editor-in-Chief of StudioX News Canada, Canada's multilingual digital news network serving multilingual diaspora communities across Canada. With a background in media production, public relations, and multicultural communications, he founded StudioX Film and TV Corporation to bridge the gap between mainstream Canadian media and the country's diverse immigrant communities. He is a member of the Canadian Association of Journalists (CAJ), RTDNA Canada, CPRS Vancouver, NEPMCC, and the Canadian Freelance Union (Unifor). Based in Surrey, British Columbia. | LinkedIn: https://www.linkedin.com/in/harnaiksinghrathor/ | Muck Rack: https://muckrack.com/harnaiksinghrathor | Email: editor@studioxnews.ca

