मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान ने दो हफ्तों के लिए सीजफायर पर सहमति जताई है। इसके बाद दुनिया के अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz को 15 दिनों के लिए खोलने का फैसला लिया गया है।
इस कदम के बाद कई सवाल उठने लगे हैं। दरअसल, इस रास्ते के बंद होने से दुनियाभर में गैस सप्लाई प्रभावित हुई थी और भारत में भी इसका असर देखने को मिला। अब जब यह जलमार्ग अस्थायी तौर पर खोला गया है, तो यह जानना जरूरी हो गया है कि क्या इससे LPG और ईंधन की किल्लत तुरंत खत्म हो जाएगी या राहत मिलने में अभी समय लगेगा।
जानकारी के मुताबिक, यह सीजफायर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की तय समयसीमा से पहले घोषित किया गया। दोनों देशों ने 15 दिनों तक हमले रोकने पर सहमति जताई है। साथ ही ईरान ने सीमित समय के लिए होर्मुज स्ट्रेट खोलकर जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू करने का फैसला किया है।
क्या होर्मुज स्ट्रेट खुलने से तुरंत राहत मिलेगी?
हालांकि सीजफायर के बाद होर्मुज स्ट्रेट खोल दिया गया है, भारत में एलपीजी की समस्या तुरंत हल नहीं होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि जहाजों की आवाजाही सामान्य होने, अटके हुए टैंकरों के निकलने और सप्लाई चैन को फिर से पटरी पर आने में समय लगेगा। फिलहाल पारस की खाड़ी में कई भारतीय जहाज फंसे हुए हैं, जिन्हें बाहर निकलने में वक्त लगेगा। हालांकि कुछ टैंकर सुरक्षित आगे बढ़ रहे हैं और जल्दी ही भारत पहुंच सकते हैं, जिससे एलपीजी की आपूर्ति पर दबाव धीरे-धीरे कम होने की संभावना है।
दो हफ्तों में क्या हो सकता है?
सीजफायर की 15 दिनों की अवधि में अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता भी चल रही है। दोनों देशों के प्रतिनिधि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मिल सकते हैं, ताकि स्थायी समाधान निकाला जा सके। ईरान ने 10 बिंदुओं का प्रस्ताव रखा है, जिसमें युद्ध खत्म करना, प्रतिबंध हटाना और समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है।

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