United States में Donald Trump की नई वैश्विक टैरिफ नीति को बड़ा कानूनी झटका लगा है। न्यूयॉर्क स्थित Court of International Trade ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ को अवैध करार दिया।
यह फैसला तीन जजों की पीठ ने 2-1 के बहुमत से दिया। अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति ने टैरिफ लगाने के मामले में अपनी कानूनी सीमा से आगे बढ़कर कार्रवाई की। बहुमत वाले फैसले में अदालत ने स्पष्ट कहा कि ये टैरिफ “अवैध” हैं और “कानून द्वारा अधिकृत नहीं” थे।
हालांकि पीठ के एक जज ने अलग राय रखते हुए कहा कि मौजूदा कानून राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने के मामले में अधिक अधिकार देता है।
यह मामला छोटे कारोबारियों द्वारा दायर मुकदमे के बाद अदालत पहुंचा था। कारोबारियों का तर्क था कि नए टैरिफ से व्यापार और आयात-निर्यात पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यदि ट्रंप प्रशासन इस फैसले को चुनौती देता है, जिसकी संभावना जताई जा रही है, तो मामला पहले U.S. Court of Appeals for the Federal Circuit और बाद में संभावित रूप से Supreme Court of the United States तक पहुंच सकता है।
दरअसल, फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा पहले लगाए गए व्यापक दोहरे अंकों वाले टैरिफ को भी रद्द कर दिया था। इसके बाद प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की सेक्शन 122 के तहत अस्थायी रूप से 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लागू किए थे। ये टैरिफ 24 जुलाई तक प्रभावी रहने वाले थे।
अदालत के इस फैसले का सीधा असर फिलहाल केवल तीन वादियों पर लागू हुआ है। इनमें Washington राज्य के साथ दो अमेरिकी कंपनियां — Burlap & Barrel और Basic Fun! शामिल हैं।
मुकदमे में शामिल इन कंपनियों का कहना था कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ से उनके कारोबार पर नकारात्मक असर पड़ा है। मसाला कारोबार से जुड़ी Burlap & Barrel और खिलौना कंपनी Basic Fun! ने अदालत में दलील दी थी कि अतिरिक्त टैरिफ के कारण आयात लागत बढ़ी और व्यापारिक अनिश्चितता पैदा हुई।
हालांकि अदालत का फैसला अभी सीधे तौर पर केवल इन पक्षों तक सीमित है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आगे चलकर अन्य मामलों और व्यापक व्यापार नीति पर भी असर डाल सकता है।
दो कंपनियों की ओर से अदालत में पैरवी करने वाले Jeffrey Schwab ने कहा कि फिलहाल यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि बाकी कारोबारों को भी इन टैरिफ का भुगतान जारी रखना होगा या नहीं।
जेफ्री श्वाब, जो Liberty Justice Center में मुकदमेबाजी निदेशक हैं, ने कहा कि अदालत का फैसला फिलहाल सीमित दायरे में लागू हुआ है। ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि क्या अन्य कंपनियों को भी राहत मिलेगी या वे पहले की तरह टैरिफ चुकाती रहेंगी।
उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में इस फैसले की कानूनी व्याख्या और संभावित अपील के आधार पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उच्च अदालतें भी इसी फैसले को बरकरार रखती हैं, तो इसका असर व्यापक व्यापारिक नीतियों और अन्य कंपनियों पर भी पड़ सकता है।
Basic Fun! के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Jay Foreman ने अदालत के फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि उनकी कंपनी ने कानूनी लड़ाई लड़ी और आखिरकार जीत हासिल की। गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, “हमने आज मुकाबला किया और जीत गए, इसे लेकर हम बेहद उत्साहित हैं।”
यह फैसला Donald Trump प्रशासन के लिए एक और बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है। ट्रंप प्रशासन लंबे समय से आयात शुल्क बढ़ाकर अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बाहरी प्रतिस्पर्धा से बचाने की नीति अपनाता रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल ट्रंप ने International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) का इस्तेमाल करते हुए अमेरिका के लंबे समय से चले आ रहे व्यापार घाटे को “राष्ट्रीय आपातकाल” घोषित किया था। इसी आधार पर प्रशासन ने दुनियाभर के कई देशों पर व्यापक वैश्विक टैरिफ लागू किए थे।
हालांकि अब अदालत के ताजा फैसले ने उन नीतियों की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आगे चलकर अमेरिकी व्यापार नीति और राष्ट्रपति के अधिकारों को लेकर बड़ी बहस का कारण बन सकता है।
Sneha Sharma is a Senior Hindi Correspondent for StudioX News Canada, leading the Hindi editorial desk at hi.studioxnews.ca. She brings over three years of journalism experience across print, digital, and broadcast media in India. Her career includes roles at Jagran New Media (Her Zindagi), Zee News Hindi, TV100, Rashtriya Sahara, Amar Ujala, and Search India News, where she worked as a content writer, ground reporter, and news anchor. She holds a BA in Journalism and Mass Communication from Dev Sanskriti University, Haridwar. At StudioX News, she covers Canada immigration, community affairs, South Asia news, and diaspora stories for Hindi-speaking communities across Canada.

