ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच अब हालात और ज्यादा गंभीर होते नजर आ रहे हैं। दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर टकराव कम होने के बजाय बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसी कड़ी में United States ने China को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है, जिससे वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है।
अमेरिका के ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि अब चीन को Iran से तेल की एक बूंद भी नहीं लेने दी जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान से चीन तक जाने वाली तेल आपूर्ति को पूरी तरह रोकने के लिए हर संभव कदम उठाएगा।
बेसेंट के बयान के मुताबिक, अमेरिका इस दिशा में कड़े कदम उठा चुका है और ईरानी बंदरगाहों पर दबाव बनाते हुए सप्लाई चेन को बाधित करने की कोशिश की जा रही है। यहां तक कि अमेरिका ने यह भी दावा किया है कि अब ईरान से तेल और गैस लेकर कोई भी जहाज चीन की ओर नहीं जा सकेगा। यह बयान साफ तौर पर इस बात का संकेत है कि वाशिंगटन अब इस मुद्दे पर आक्रामक रणनीति अपना रहा है।
हालांकि, दूसरी ओर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में अलग तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी चेतावनी के बावजूद ईरान के बंदरगाहों से कम से कम तीन तेल टैंकर सुरक्षित रूप से निकलकर Hormuz Strait पार करने में सफल रहे हैं। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है, और यहां किसी भी तरह की हलचल का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
अमेरिका भले ही यह दावा कर रहा हो कि अब कोई भी जहाज ईरान से बाहर नहीं निकल पाएगा, लेकिन सामने आ रही इन रिपोर्ट्स ने हालात को और पेचीदा बना दिया है। कुल मिलाकर, इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि ईरान, अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता तनाव आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और ऊर्जा बाजार को गहराई से प्रभावित कर सकता है।
अमेरिका द्वारा चीन को ईरान से तेल लेने से रोकने के पीछे कई रणनीतिक और आर्थिक कारण जुड़े हुए हैं। दरअसल, वाशिंगटन लंबे समय से Iran पर दबाव बनाने की नीति पर काम कर रहा है, और इसमें ऊर्जा क्षेत्र सबसे अहम भूमिका निभाता है। अमेरिका का मानना है कि अगर ईरान लगातार तेल निर्यात करता रहा, तो उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती रहेगी, जिससे उस पर लगाए गए प्रतिबंधों का असर कम हो जाएगा।
China को अमेरिका ईरान का एक प्रमुख आर्थिक साझेदार मानता है। ऐसे में यदि चीन बड़े स्तर पर ईरानी तेल खरीदता है, तो तेहरान को आर्थिक राहत मिलती रहती है। यही वजह है कि United States इस सप्लाई चेन को तोड़ने की कोशिश कर रहा है, ताकि ईरान की आमदनी पर सीधा असर डाला जा सके।
हाल के दिनों में अमेरिका की चिंताएं और भी बढ़ी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने चीन पर आरोप लगाया था कि वह ईरान को एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम जैसी सैन्य सहायता उपलब्ध करा रहा है। ऐसे आरोपों ने अमेरिका की रणनीति को और सख्त बना दिया है, क्योंकि उसे डर है कि आर्थिक सहयोग के साथ-साथ सैन्य सहयोग भी क्षेत्रीय असंतुलन को बढ़ा सकता है।

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