HOME

stories

STORIES

google-news

FOLLOW

FOLLOW

JOIN

तेल उद्योग पर ईरान युद्ध की मार, हर दिन 1600 करोड़ का नुकसान दर्ज

Updated: 15-04-2026, 01.58 PM

Follow us:

United States और Iran के बीच चल रहे तनाव का असर अब वैश्विक स्तर पर दिखने लगा है और इसका प्रभाव सीधे तौर पर भारत की तेल अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण भारतीय सरकारी तेल कंपनियों की लागत लगातार बढ़ती जा रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मौजूदा हालात में पेट्रोल और डीजल की बिक्री कंपनियों के लिए घाटे का सौदा बन गई है। अनुमान के मुताबिक, पेट्रोल पर प्रति लीटर लगभग 18 रुपये और डीजल पर करीब 35 रुपये तक का नुकसान दर्ज किया जा रहा है। यानी हर बिक्री पर कंपनियों को भारी आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है।

सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लागत बढ़ने के बावजूद भी उपभोक्ताओं के लिए रिटेल कीमतों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। कीमतों को स्थिर रखने के कारण पूरा बोझ तेल कंपनियों पर आ रहा है, जिससे उनका घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है।

अगर यही स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल तेल कंपनियां इस असंतुलन को संभालने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन वैश्विक कच्चे तेल बाजार की अनिश्चितता ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारत के पेट्रोलियम सेक्टर पर देखने को मिल रहा है। देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियां—Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited—पेट्रोल और डीजल की कीमतों को बाजार आधारित व्यवस्था के अनुसार तय करती हैं। हालांकि, अप्रैल 2022 के बाद से घरेलू स्तर पर ईंधन की खुदरा कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।

इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में काफी अस्थिरता देखी गई है। Russia-Ukraine War के बाद वैश्विक तेल कीमतें बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थीं। इसके बाद साल 2026 की शुरुआत में कुछ राहत जरूर मिली और कीमतें घटकर करीब 70 डॉलर प्रति बैरल तक आ गईं। लेकिन मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते फिर से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है और यह एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं।

इस अस्थिर माहौल का सीधा असर तेल कंपनियों की बैलेंस शीट पर पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने तक सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना करीब 2,400 करोड़ रुपये तक का घाटा उठाना पड़ रहा था। हालांकि हाल के समय में यह नुकसान घटकर लगभग 1,600 करोड़ रुपये प्रतिदिन के स्तर पर आ गया है।

Related Latest News

Leave a Comment

About Us

StudioxNews न्यूज़ लेखक और ब्लॉगर द्वारा बनाया गया है. हिंदी वायरल का मुख्य उद्देश्य है ताज़ा जानकारी को सबसे तेज सबसे रीडर तक पहुँचाना। इस न्यूज़ ब्लॉग को बनाने के लिए कई सारे एक्सपर्ट लेखक दिन रात अथक प्रयास में रहते है. हिंदी वायरल का मुख्य उद्देश्य अपने पाठको को वेब और मोबाइल पर ऑनलाइन समाचार देखने वाले दर्शकों का एक वफादार आधार बना रहा है।