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ईरान का इजरायल पर सीधा हमला: बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से जवाबी कार्रवाई, मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव

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ईरान का इजरायल पर सीधा हमला: बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से जवाबी कार्रवाई, मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव

ईरान ने हाल ही में इजरायल पर एक अभूतपूर्व सीधा सैन्य हमला किया है, जिसमें सैकड़ों ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। इस घटना ने मध्य पूर्व की पहले से ही अस्थिर स्थिति को एक नए और खतरनाक मोड़ पर ला दिया है, जिससे क्षेत्र में व्यापक संघर्ष के फैलने की आशंकाएं बढ़ गई हैं। यह पहली बार है जब ईरान ने अपनी संप्रभु धरती से सीधे इजरायल पर हमला किया है, जो दोनों चिर-प्रतिद्वंद्वियों के बीच दशकों से चल रहे छद्म युद्ध को खुली सीधी सैन्य भिड़ंत में बदलता दिख रहा है।

तेहरान ने दावा किया है कि यह हमला दमिश्क, सीरिया में उसके वाणिज्य दूतावास पर 1 अप्रैल को हुए इजरायली हवाई हमले का सीधा जवाब था। उस हमले में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के कई वरिष्ठ कमांडरों सहित कई लोग मारे गए थे, जिनमें ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद रेजा ज़ाहेदी जैसे महत्वपूर्ण अधिकारी भी शामिल थे। ईरान ने इस जवाबी कार्रवाई को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत अपने आत्मरक्षा के निहित अधिकार के तौर पर प्रस्तुत किया है, जो किसी भी सशस्त्र हमले की स्थिति में राज्यों को आत्मरक्षा का अधिकार देता है।

इजरायली रक्षा बलों (आईडीएफ) के अनुसार, ईरान ने 300 से अधिक ड्रोन, क्रूज मिसाइलें और बैलिस्टिक मिसाइलें लॉन्च कीं। इजरायल की उच्च-प्रौद्योगिकी रक्षा प्रणाली, जिसमें प्रसिद्ध आयरन डोम के साथ-साथ एरो जैसे उन्नत सिस्टम शामिल हैं, ने इन अधिकांश हमलावर प्रक्षेप्य को सफलतापूर्वक रोक दिया। इस कार्य में संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और जॉर्डन जैसे सहयोगी देशों ने भी महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की, जिन्होंने इजरायली हवाई क्षेत्र में पहुंचने से पहले कई ईरानी हमलों को विफल करने में मदद की। इस बड़े पैमाने के हमले के बावजूद, इजरायल में नुकसान बहुत कम रहा; एक सैन्य अड्डे को मामूली क्षति हुई और केवल एक बच्चे के घायल होने की सूचना मिली।

इस घटना के बाद वैश्विक स्तर पर तत्काल प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इजरायल के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई और उसकी सुरक्षा का समर्थन करने का संकल्प लिया, लेकिन साथ ही उन्होंने क्षेत्र में तनाव कम करने का भी आग्रह किया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने स्थिति पर चर्चा के लिए एक आपातकालीन सत्र बुलाया, जिसमें वैश्विक समुदाय ने सभी पक्षों से संयम बरतने और आगे की वृद्धि से बचने की अपील की। लेबनान स्थित ईरान समर्थित समूह हिजबुल्लाह भी इस क्षेत्र में सक्रिय रहा है, जिसने गाजा संघर्ष के समानांतर इजरायली ठिकानों पर अपने स्वयं के हमले किए हैं, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता की परतें और गहरी हुई हैं।

इजरायली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका देश अपनी रक्षा करेगा और ईरान के इस सीधे हमले का जवाब देने का अधिकार रखता है। इजरायल की युद्ध कैबिनेट ने संभावित जवाबी कार्रवाई की योजना पर विचार-विमर्श किया है। विश्लेषकों का मानना है कि इजरायल की कोई भी महत्वपूर्ण जवाबी कार्रवाई मध्य पूर्व को एक पूर्ण पैमाने के युद्ध में धकेल सकती है, जिसके परिणाम क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए अप्रत्याशित होंगे। गाजा में हमास के साथ चल रहे संघर्ष और अन्य छद्म युद्धों के बीच यह सीधी सैन्य भिड़ंत पहले से ही नाजुक क्षेत्र में नई और गंभीर जटिलताएं पैदा कर रही है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस नाजुक मोड़ पर अत्यधिक चिंता के साथ स्थिति पर नज़र रख रहा है। किसी भी गलत अनुमान या अत्यधिक कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं, जिसमें ऊर्जा बाजारों पर गंभीर प्रभाव और लाखों लोगों का विस्थापन शामिल है। राजनयिक प्रयास अब तनाव को कम करने और एक और विनाशकारी संघर्ष को रोकने पर केंद्रित हैं, हालांकि दोनों पक्ष अपने-अपने सुरक्षा हितों और संप्रभुता के दावों पर अड़े हुए हैं, जिससे स्थिति बेहद अनिश्चित बनी हुई है।

Image: Pixabay

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