एक समय ऐसा था जब कनाडा को दुनिया के सबसे आकर्षक एजुकेशन हब्स में गिना जाता था। बेहतर शिक्षा व्यवस्था, पढ़ाई के साथ काम करने की सुविधा, आसान इमिग्रेशन रास्ते और स्थायी निवास की उम्मीद ने लाखों अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अपनी ओर खींचा। खासतौर पर भारत समेत एशियाई देशों के छात्रों के बीच कनाडा का क्रेज लगातार बढ़ रहा था।
लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदलती दिखाई दे रही है। हाल के महीनों में कनाडा आने वाले नए अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। स्थिति ऐसी बन गई है कि नए स्टूडेंट्स के आंकड़े कोविड महामारी के दौर से भी नीचे पहुंचते नजर आ रहे हैं। इससे कनाडा की शिक्षा व्यवस्था, इमिग्रेशन नीतियों और वहां के भविष्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। कनाडाई सरकार ने पिछले कुछ समय में स्टडी परमिट, वर्क परमिट और पोस्ट-ग्रेजुएशन अवसरों को लेकर कई सख्त बदलाव किए हैं। इसके अलावा बढ़ती महंगाई, रहने के लिए घरों की कमी, ऊंचा किराया और नौकरी बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने भी विदेशी छात्रों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
कई छात्रों का कहना है कि पहले कनाडा को सिर्फ पढ़ाई के लिए नहीं बल्कि बेहतर भविष्य और स्थायी बसने के विकल्प के तौर पर देखा जाता था। लेकिन अब नियमों में लगातार बदलाव और वीजा प्रक्रिया में बढ़ती सख्ती के कारण अनिश्चितता बढ़ गई है। यही वजह है कि कई छात्र अब ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और यूरोप के अन्य देशों की ओर रुख कर रहे हैं।
इमिग्रेशन विशेषज्ञों के मुताबिक, कनाडा की सरकार पर स्थानीय स्तर पर बढ़ते आवास संकट और संसाधनों के दबाव को लेकर लगातार राजनीतिक दबाव है। इसी कारण सरकार अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठा रही है। हालांकि इसका असर सीधे तौर पर उन कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज पर पड़ रहा है, जो विदेशी छात्रों से मिलने वाली फीस पर काफी हद तक निर्भर हैं।
आंकड़े यह भी संकेत दे रहे हैं कि विदेशी छात्रों की घटती संख्या का असर कनाडा की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय छात्र हर साल अरबों डॉलर का योगदान देते हैं और रिटेल, हाउसिंग, ट्रांसपोर्ट और पार्ट-टाइम रोजगार जैसे कई सेक्टर उनसे जुड़े हुए हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कनाडा की सख्त नीतियां छात्रों को दूर कर रही हैं, या फिर वैश्विक स्तर पर बदलते हालात ने छात्रों की प्राथमिकताएं बदल दी हैं। आने वाले समय में यह साफ होगा कि कनाडा अपनी एजुकेशन डेस्टिनेशन वाली छवि को दोबारा मजबूत कर पाता है या नहीं।
इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज़ एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) द्वारा जारी वर्ष 2025 के आंकड़ों ने अंतरराष्ट्रीय शिक्षा को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे साल के दौरान केवल 75,372 नए स्टडी परमिट ही मंजूर किए गए, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम माने जा रहे हैं।
ये आंकड़े इस बात का संकेत दे रहे हैं कि कनाडा में पढ़ाई के लिए आने वाले विदेशी छात्रों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज हो रही है। खास बात यह है कि यह कमी सिर्फ मामूली नहीं बल्कि 2024 के मुकाबले भी बड़ी गिरावट के रूप में देखी जा रही है। इससे यह बहस तेज हो गई है कि क्या कनाडा अब छात्रों के लिए पहले जैसा आकर्षक विकल्प नहीं रह गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्टडी परमिट मंजूरी में आई इस गिरावट के पीछे कई कारण हो सकते हैं। हाल के महीनों में कनाडाई सरकार ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों को लेकर कई सख्त कदम उठाए हैं। इनमें स्टडी परमिट की संख्या सीमित करना, कॉलेजों पर निगरानी बढ़ाना और इमिग्रेशन नियमों को कड़ा बनाना शामिल है।
इसके अलावा, कनाडा में तेजी से बढ़ती महंगाई और हाउसिंग संकट भी विदेशी छात्रों के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। कई शहरों में किराए इतने बढ़ चुके हैं कि छात्रों के लिए रहने और पढ़ाई का खर्च संभालना मुश्किल हो रहा है। यही कारण है कि अब कई छात्र कनाडा की जगह दूसरे देशों के विकल्प तलाश रहे हैं।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि अगर यही रुझान जारी रहा, तो इसका असर कनाडा की यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों पर भी पड़ सकता है। विदेशी छात्रों से मिलने वाली फीस कई संस्थानों की आय का बड़ा हिस्सा होती है। ऐसे में नए स्टूडेंट्स की घटती संख्या आर्थिक दबाव बढ़ा सकती है।
पिछले दो वर्षों में कनाडा सरकार ने विदेशी छात्रों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए कई कड़े फैसले लागू किए हैं। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों की लगातार बढ़ती आबादी का असर देश के हाउसिंग सिस्टम, किराए की कीमतों और सार्वजनिक सेवाओं पर पड़ रहा था। इसी वजह से स्टडी परमिट की संख्या सीमित करने, वित्तीय नियमों को सख्त बनाने और कॉलेजों के लिए नए मानक तय करने जैसे कदम उठाए गए।
इन नीतियों का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। पहले जहां कनाडा दुनियाभर के छात्रों के लिए आसान वीजा प्रक्रिया, पढ़ाई के बाद वर्क परमिट और स्थायी निवास के अवसरों की वजह से सबसे आकर्षक विकल्प माना जाता था, वहीं अब कई छात्र दूसरे देशों की ओर रुख कर रहे हैं। बढ़ते खर्च, वीजा नियमों में सख्ती और भविष्य को लेकर अनिश्चितता ने छात्रों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का उद्देश्य इमिग्रेशन सिस्टम को संतुलित करना और संसाधनों पर बढ़ते दबाव को कम करना है, लेकिन इसका सीधा असर कॉलेजों और यूनिवर्सिटी सेक्टर पर भी पड़ रहा है। कई संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय छात्रों से मिलने वाली फीस पर काफी हद तक निर्भर रहना पड़ता है, ऐसे में नए दाखिलों में गिरावट उनके लिए चुनौती बन सकती है।
भारतीय छात्रों पर भी इसका बड़ा असर देखने को मिल रहा है, क्योंकि कनाडा लंबे समय से भारतीय युवाओं के बीच सबसे लोकप्रिय शिक्षा गंतव्यों में शामिल रहा है। अब कई छात्र कनाडा के बजाय ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और यूरोप के अन्य देशों को विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।
Sneha Sharma is a Senior Hindi Correspondent for StudioX News Canada, leading the Hindi editorial desk at hi.studioxnews.ca. She brings over three years of journalism experience across print, digital, and broadcast media in India. Her career includes roles at Jagran New Media (Her Zindagi), Zee News Hindi, TV100, Rashtriya Sahara, Amar Ujala, and Search India News, where she worked as a content writer, ground reporter, and news anchor. She holds a BA in Journalism and Mass Communication from Dev Sanskriti University, Haridwar. At StudioX News, she covers Canada immigration, community affairs, South Asia news, and diaspora stories for Hindi-speaking communities across Canada.

