कनाडा

ईरान संघर्ष का पहला बड़ा आर्थिक झटका? कनाडा की अर्थव्यवस्था लड़खड़ाई

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पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बढ़ते दबाव के बीच कई देशों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। इसी क्रम में कनाडा की अर्थव्यवस्था कोविड-19 महामारी के बाद पहली बार तकनीकी मंदी की चपेट में आ गई है, जबकि यूरोप की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल फ्रांस के सामने भी आर्थिक सुस्ती का खतरा बढ़ता जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान से जुड़े संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधित समुद्री गतिविधियों ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है, जिसका असर ईंधन, परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ रहा है। परिणामस्वरूप कई देशों में महंगाई का दबाव बढ़ गया है।

कनाडा की आर्थिक चुनौतियां केवल वैश्विक परिस्थितियों तक सीमित नहीं हैं। अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों में आई बाधाओं और टैरिफ से जुड़े दबावों का भी उसकी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। अमेरिका कनाडा का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, इसलिए दोनों देशों के बीच व्यापार में किसी भी तरह की सुस्ती का सीधा प्रभाव कनाडाई बाजार पर पड़ता है।

आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, कनाडा की जीडीपी में पहली तिमाही के दौरान 0.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले की तिमाही में अर्थव्यवस्था 1.0 प्रतिशत सिकुड़ी थी। लगातार दो तिमाहियों तक आर्थिक गतिविधियों में गिरावट को तकनीकी रूप से मंदी माना जाता है। इसी आधार पर कनाडा अब आधिकारिक तौर पर मंदी की स्थिति में पहुंच गया है। उल्लेखनीय है कि पिछले छह वर्षों में यह पहला अवसर है जब देश की अर्थव्यवस्था लगातार दो तिमाहियों तक संकुचन का सामना कर रही है, जिससे सरकार और आर्थिक विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है।

आर्थिक विशेषज्ञों को उम्मीद थी कि दूसरी तिमाही में कनाडा की अर्थव्यवस्था में करीब 1.5 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिलेगी, लेकिन वास्तविक आंकड़े अनुमान से काफी कमजोर रहे। जीडीपी में गिरावट ने यह संकेत दिया कि देश की आर्थिक गतिविधियां अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। इसके साथ ही श्रम बाजार में भी कमजोरी के संकेत मिलने लगे हैं, जिससे आर्थिक स्थिति को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, कई घरेलू और वैश्विक कारकों ने मिलकर कनाडा की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाया है। सोने के आयात में बढ़ोतरी, रियल एस्टेट और हाउसिंग सेक्टर में सुस्ती तथा व्यवसायों द्वारा निवेश में कमी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। जब कंपनियां नए निवेश से बचने लगती हैं और आवास क्षेत्र की गतिविधियां कमजोर पड़ती हैं, तो इसका असर रोजगार, उत्पादन और उपभोक्ता मांग पर भी पड़ता है।

इस बीच, कनाडा में घरेलू बचत दर (हाउसहोल्ड सेविंग्स रेट) भी घटकर 3.5 प्रतिशत पर आ गई है, जो 2024 की पहली तिमाही के बाद सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई ने लोगों के मासिक खर्च में काफी इजाफा किया है, जबकि आय में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई। परिणामस्वरूप लोगों को अपनी बचत का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे बचत दर में गिरावट दर्ज की गई है।

अमेरिका के साथ जारी टैरिफ और व्यापारिक तनाव भी कनाडा के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। चूंकि अमेरिका कनाडा का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, इसलिए दोनों देशों के बीच व्यापारिक चुनौतियों का सीधा असर कनाडाई उद्योगों और आर्थिक विकास पर पड़ता है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि ये दबाव लंबे समय तक बने रहते हैं, तो आने वाले महीनों में भी कनाडा की अर्थव्यवस्था को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

snrhd

Sneha Sharma is a Senior Hindi Correspondent for StudioX News Canada, leading the Hindi editorial desk at hi.studioxnews.ca. She brings over three years of journalism experience across print, digital, and broadcast media in India. Her career includes roles at Jagran New Media (Her Zindagi), Zee News Hindi, TV100, Rashtriya Sahara, Amar Ujala, and Search India News, where she worked as a content writer, ground reporter, and news anchor. She holds a BA in Journalism and Mass Communication from Dev Sanskriti University, Haridwar. At StudioX News, she covers Canada immigration, community affairs, South Asia news, and diaspora stories for Hindi-speaking communities across Canada.

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