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ईरान युद्ध के चलते तेल की बढ़ती कीमतों से भारत और आसपास के देशों के बजट पर भारी असर।

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है। खासकर दक्षिण एशिया के देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ गई हैं और सप्लाई कम हो गई है, जिससे करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। हमारे लिए अच्छी खबर यह है कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी स्थिर हैं, और घरेलू LPG की कीमतें भी नहीं बढ़ीं। वहीं, पड़ोसी देशों में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं।

बांग्लादेश और पाकिस्तान में स्थिति और गंभीर है। बांग्लादेश में कुकिंग गैस के वितरण केंद्रों पर लंबी कतारें लग रही हैं। देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का 95% आयात करता है, इसलिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें क्रमशः 116 टका और 100 टका प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं। बिजली बचाने के लिए सरकार ने दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम की सलाह दी है, यूनिवर्सिटीज बंद कर दी गई हैं और ईंधन की राशनिंग भी शुरू कर दी गई है।

बांग्लादेश में हालात गंभीर हैं। वहां कुकिंग गैस के वितरण केंद्रों पर लंबी कतारें लगी हुई हैं। देश अपनी ऊर्जा की जरूरतों का 95% आयात करता है, इसलिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें क्रमशः 116 टका और 100 टका प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं। बिजली की बचत के लिए सरकार ने दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम की सलाह दी है, विश्वविद्यालय बंद कर दिए गए हैं और ईंधन की राशनिंग भी लागू कर दी गई है।

पाकिस्तान में भी ईंधन महंगा हो गया है। वहां पेट्रोल की कीमत 458-460 रुपये और डीजल की कीमत 500-520 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जो दक्षिण एशिया में सबसे ऊंचा स्तर है।

नेपाल में भी ऊर्जा संकट की वजह से हालात मुश्किल हो गए हैं। कच्चे तेल की कीमतें 110-113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं और विदेशी मुद्रा भंडार घटने के कारण सरकार ने कई कदम उठाए हैं। अब सरकारी दफ्तर और बैंक सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक ही खुलेंगे। बिजली बचाने के लिए शॉपिंग मॉल और बाजार शाम 7 बजे के बाद बंद कर दिए गए हैं। शादी और पार्टियों में सजावटी लाइटिंग भी पूरी तरह से बंद करने का आदेश दिया गया है।

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