भारत

Middle East में तनाव के बावजूद सस्ता हुआ कच्चा तेल, 95 डॉलर के नीचे फिसले दाम

Crude Oil Price Fall Today: ईरान-इजरायल के बीच तनाव जारी रहने के बावजूद बुधवार, 25 मार्च की सुबह कच्चे तेल की कीमतों में करीब 6% की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट ने बाजार का ध्यान खींचा है, जबकि शेयर बाजार में भी तेजी देखने को मिल रही है।

आम तौर पर ऐसे हालात में तेल की कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन इस बार उल्टा ट्रेंड दिख रहा है। माना जा रहा है कि तेल की कीमतों में यह गिरावट अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान के बाद आई है। अब सवाल यह है कि क्या यह हालात सामान्य होने का संकेत है?

बातचीत की उम्मीद से घटे तेल के दाम

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की एक बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत की खबरें हैं। बताया जा रहा है कि तनाव कम करने के लिए अमेरिका कूटनीतिक कोशिशें तेज कर रहा है और एक महीने के युद्धविराम की संभावना भी जताई जा रही है। इससे बाजार को कुछ राहत मिली है।

इन सकारात्मक संकेतों का असर तेल की कीमतों पर साफ दिखा। अमेरिकी कच्चा तेल (WTI) 88 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड भी गिरकर 95 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया है।

इजरायल का रुख बना अहम

जहां एक ओर बातचीत की उम्मीदें दिख रही हैं, वहीं इजरायल अपने सख्त रुख पर कायम है। संकेत हैं कि उसका सैन्य अभियान फिलहाल जारी रह सकता है और वह सीजफायर को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल को शक है कि ईरान किसी समझौते को आसानी से स्वीकार करेगा। ऐसे में हालात को लेकर अभी कुछ भी निश्चित कहना मुश्किल है।

महंगाई बढ़ने की आशंका

मिडिल ईस्ट में जारी अनिश्चितता का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि अगर तनाव या युद्ध लंबा खिंचता है, तो महंगाई बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाएगा।

इसके अलावा, अगर होर्मुज स्ट्रेट प्रभावित होता है, तो ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है। खासकर भारत जैसे देशों के लिए, जो तेल और गैस के आयात पर काफी निर्भर हैं। सप्लाई घटने से न सिर्फ व्यापार प्रभावित होगा, बल्कि आम लोगों के घर का बजट भी बिगड़ सकता है।

?s=150&d=mp&r=g
+ posts

Follow StudioX Hindi News:

Read in other languages:

en
Author
en

Related Stories